तो क्या अंबानी ग्रुप कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर कब्जा कर लेगा

0
343

एफएमसीजी के चीतों के बीच शेर के झपट्टे…. भारत की विशाल जनसंख्या और इस पर खड़े कई लाख करोड़ रुपए के एफएमसीजी बाजार में दशकों पहले से मौजूद देसी विदेशी चीतों के बीच एक आक्रामक शेर उतर आया है। ताकत और रणनीति की बिसात बिछाने में माहिर शेर झपट्टे मारने लगा है, यह एक तरफ कंज्यूमर प्रोडक्ट्स बनाने -बेचने वाली कंपनियों और उनके लोकप्रिय ब्रांडों का धकाधक अधिग्रहण करता जा रहा है और साथ -साथ तमाम शहरों में फैली अपनी रिटेल स्टोर्स चेन के जरिए उपभोक्ताओं के बीच पैठ गहरी करता जा रहा है।

ठीक वैसे ही जैसे २०१६ में मोबाइल सेवा क्षेत्र में उतरने के कुछ समय के अतंराल में ही अपनी बादशाहत कायम कर ली थी। रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी- फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) की खपत का स्तर बहुत बड़ा है। इस बाजार पर हर छोटे बड़े उद्योगपति की लार टपकती ही रहती है। भारतीय एफएमसीजी बाजार के पुराने खिलाड़ियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी (मूलरूप से ब्रिटिश कंपनी थी) नेसले, प्राॉक्टर ऐंड गैम्बल, ब्रिटानिया सरीखे मल्टीनेशनल दिग्गजों के पैर दशकों से जमे हुए हैं।

फिर भी तेज रफ्तार से पसरते बाजार में गोदरेज, टाटा, दमाणी, अडाणी, डाबर और पतंजलि फूड्स सहित कई देसी कंपनियों ने कद्दावरों से टक्कर लेते हुए बाजार में अपने को सुस्थापित करने में कामयाबी भी हासिल की। टेक्सटाइल से उभरे और पेट्रोलियम से धनकुबेर बनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमोटर मुकेश अंबानी ने विविधता योजना के तहत पहले मोबाइल सेवा (जियो) के क्षेत्र में आधिपत्य बनाया और फिर रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान के बाजार में दो दो हाथ करने की ठानी। अपने खुद के रिटेल स्टोर्स खोल दिए जिनकी संख्या बढ़ते बढ़ाते पंद्रह हजार से ऊपर पहुंच चुकी है।

इन स्टोर्स के माध्यम से अंबानी की कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (आरसीपीएल) ब्रांडेड बाथ सोप, डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट, साॅफ्ट ड्रिंक्स, आटा , दाल , चाकलेट, हेल्थ फूड काॅस्मेटिक्स, गारमेंटऔर ज्यूलरी से लेकर वो हर प्राॅडक्ट बेच रही है जो उपभोक्ता की जरूरत पूरी करता है। इन प्राॅडक्ट्स की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मुकेश अंबानी ग्रुप लगातार देसी विदेशी कंपनियों और इनके ब्रांडों को खरीदता जा रहा है और इन ब्राडों के जरिए उपभोक्ताओं के बीच बहुत तेजी से अपनी पैठ गहरी करता जा रहा है।

रिलायंस ने 1970-80 के दौरान लोकप्रिय देसी कोल्डड्रिंक कैंपाकोला का अधिग्रहण 22करोड़ में करने कि बाद हाल ही में रिलांच कर दिया, श्री लंका के प्रतिष्ठित बिस्कुट ब्रांड मालिबान, सोस्यो हजूरी के कोल्डड्रिंक, लोटस चाकलेट के तहत कनफेक्शनरी को, इंडिपेंडेंस ब्रांड के तहत स्टेपल्स, फूड्स व एसेंशियल आइटम्स, ग्लिमर ब्यूटी सोप, डोज़ो डिशवाश व बार, गेट रियल नेचुरल सोप, प्यूरिक हाइजीन सोप, होमगार्ड टायलेट – फ्लोर क्लीनर को अपने प्रतिद्वंद्वी ब्रांडों के मुकाबले स्थापित करने को 15_20 से लेकर 40_45 फीसद डिस्काउंट मूल्यों पर बेच रही है।

‌‌हर तरह के संसाधनों से लैस मुकेशअंबानी ग्रुप यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लि. अपनी सहायक कंपनियों के जरिए हर क्षेत्र में हाथ आजमाने को उतावली है। इसका अब तक का आचरण यह रहा है कि यह जिस क्षेत्र में उतरती है सम दाम दंड भेद को अपनाकर उसमें टाॅप पर पहुंचना और अपना वर्चस्व कायम करती है । भारतीय एफएमसीजी बाजार के डीलडौल का सहज्ञ अनुमान प्रमुख कंपनियों के सालाना कारोबार से लगाया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में आईटीसी ने 59745 करोड़ रुपए, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने 51193 करोड़ रुपए, अडाणी विल्मार ने 52361 करोड़ रुपए, पतंजलि फूड्स ने 24000करोड़, नेस्ले इंडिया ने 16897 करोड़ रुपए, ब्रिटानिया ने 13371 करोड़ रुपए, डाबर ने 8179 करोड़ रुपए, टाटा कंज्यू प्राॅडक्ट्स लि. ने 7932 करोड़ रुपए गोदरेज ने 7000 करोड़ और घड़ी डिटर्जेंट की निर्माता कंपनी आरएसपीएल लि. (राहुल सर्फेक्टैंट्स) रुपए ने पांच हजार करोड़ रुपए का कारोबार हासिल किया। देश की आबादी को देखते हुए रोजमर्रा के खपत वाले प्राॅडक्ट्स की खपत तो लगातार बढ़नी ही है। जाहिर है जो जबर होगा मार्केट का सिकंदर वही होगा, पाठक निष्कर्ष निकालने में स्वयं सक्षम हैं।

प्रणतेश बाजपेयी