लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय इतिहास में एक रिकॉर्ड कायम कर दिया है। उन्होंने 10 जून को एक चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4399 दिनों तक शासन करने का एक रिकॉर्ड बना दिया है, जो दिवंगत प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से एक दिन अधिक हो गया है। और अभी तो उनके वर्तमान शासनकाल का सिर्फ दो साल ही पूरा हुआ है, अभी तीन साल और बाकी है। यानी वे एक ऐसा रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर हैं, जिसको तोड़ना भविष्य में किसी के लिए बहुत आसान नहीं होगा। नरेंद्र मोदी की सफलता का एक उदाहरण यह भी है कि उनके सहयोगी दलों के साथी उनकी तारीफ करते हैं, और उनसे व्यक्तिगत जुड़ाव रखते हैं। और गठबंधन की राजनीति में ये सबसे बड़ा मुकाम है। लोग तो अब ये भी कहने लगे हैं कि घायल मोदी तो और भी घातक हो गये है।
* 2014 के लोस चुनाव में 282 सीटों से शुरुआत करने वाले नरेंद्र मोदी ने 2019 में 303 सीटें पाई थीं
* 2024 में विपक्ष के एक फेक नेगेटिव के चलते सीटें घटकर 240 ही रह गई लेकिन उनके तेवर और तीखे हो गए
* जिस तरह एनडीए के घटक दलों को साथ लेकर लगातार कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं ये अपने आप में एक मिसाल है
* मिसाल तो अभी-अभी ये भी बना है कि नरेंद्र मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के शासन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है
2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटों से भाजपा राज की शुरुआत करने वाले नरेंद्र मोदी ने अपना 5 साल का कार्यकाल ठीक से पूर्ण किया। 2019 के चुनाव में जनता ने एक बार फिर और ज्यादा बहुमत देकर उन्हें 303 सीटें दी। इस कार्यकाल के दौरान कई बड़े काम हुए। जैसे जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाना, तीन तलाक खत्म करने का कानून पास करना, वक्फ संशोधन कानून पास करना आदि। परंतु 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के एक फेक नैरेटिव के चलते जनता भ्रमित हो गई और भाजपा को सिर्फ 240 सीटों पर ही सीमित रह जाना पड़ा। लेकिन गठबंधन के साथियों के विश्वास ने उन्हें एक बार फिर प्रधानमंत्री पद का तोहफा दिया और अब वे लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। और यह दिवंगत प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड के बराबर है। और अब तो नरेंद्र मोदी ने स्वर्गीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों तक लगातार शासन का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भाजपा को सीटें कम मिली हैं, लेकिन तेवर वही बने हुए हैं। 303 सीटों वाले कार्यकाल के दौरान उन्होंने बहुत सारे परिवर्तन किये। और विपक्ष की लाख कोशिशें के बावजूद वे अपने एजेंडे पर काम करते चले जा रहे हैं। लोकसभा या फिर राज्य सभा में कोई बाधा नहीं आने पाई। तीसरे कार्यकाल के दौरान विपक्ष ने लाख कोशिश की कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया जाए लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। विपक्ष ने यह भी कोशिश की कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया जाए लेकिन वह भी नहीं हो पाया।
अपने तीसरे टर्म में नरेंद्र मोदी ने तो वह काम कर दिया है जो अब तक कोई बीजेपी या जनसंघ का नेता नहीं कर पाया। पश्चिम बंगाल में अब तक की सबसे बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस को परास्त करते हुए अपनी प्रचंड बहुमत की सरकार बना ली है, वह भी 208 सीटों से। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। और उस जीत का आलम यह है कि टीएमसी में भागम भाग मच गई है, टीएमसी दो-फाड़ हो गई है। टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों ने पाला बदलकर अपना गुट बना लिया है, और असली टीएमसी होने का दावा कर रहे हैं। यही स्थिति लोकसभा में भी है। खबर है कि 20 से अधिक लोकसभा सांसदों ने दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए अलग गुट की मान्यता मांग ली है, जो जल्द ही मिल जाने की उम्मीद है। उधर राज्य सभा से धड़ाधड़ इस्तीफे हो रहे हैं। खबर है कि वे सभी भाजपा के संपर्क में हैं। यानी कि तीसरे कार्यकाल में भी नरेंद्र मोदी की राजनीतिक ठसक बनी हुई है। और काम करने का ही नतीजा है कि पूरे भारत में इस समय भाजपा और एनडीए की आधे से अधिक राज्यों में सरकारें हैं। कुल मिलाकर ये कह सकते हैं कि जो रुतबा कभी कांग्रेस का हुआ करता था आजादी के बाद, उससे भी बेहतर स्थिति में इस समय भाजपा पहुंच गई है। हां, दक्षिण के कुछ राज्यों में अभी वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन अपनी धीरे-धीरे आगे बढ़ने की नीति पर चलकर वह कभी भी कोई करिश्मा कर सकती है। कर्नाटक में तो वह सरकार भी बना चुकी है।
नरेंद्र मोदी की स्वीकार्यता और सफलता का आलम यह है कि एनडीए के जिन घटक दलों पर विपक्ष आंखें गड़ाए बैठे रहता है कि अब टूटे तो तब टूटे, वही घटक दल उनके प्रबल समर्थक हैं। भारत मंडपम दिल्ली में 10 जून को हुए एक सेलीब्रेशन कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मोदी अब तक के सबसे सफल प्रधानमंत्री हैं और विश्व नेता के रूप में उभरे हैं। यही बात जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने भी अपने भाषणों में कहीं। विपक्ष हमेशा इन्हीं दोनों दलों को लेकर भाजपा को डराने की कोशिश में लगा रहता है कि इनका कोई भरोसा नहीं। परंतु भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम के दौरान जो माहौल देखने को मिला, उससे तो यही लगता है कि आने वाले समय में विपक्ष को अभी कोई स्पेस नहीं मिलने वाला है।
अभयानंद शुक्ल


