ग्राम प्रधानी की गिफ्ट से रिटर्न गिफ्ट की भाजपाई चाल…

योगी सरकार ने प्रधानों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना कर एक ही तीर से कई शिकार कर लिये हैं। इससे भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले वाली परीक्षा अर्थात पंचायत चुनाव से नहीं गुजरना होगा। इसके अलावा योगी सरकार की कृपा से मिली छह महीने की अतिरिक्त मलाई से कई ग्राम प्रधानों की दलीय निष्ठा भी बदल सकती है, जिसका लाभ भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनावों में हो सकता है। मतलब यह आदेश भाजपाई पैकेट में अतिरिक्त ग्राम प्रधानी का गिफ्ट है, जिसका रिटर्न गिफ्ट विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिल सकता है। इससे भाजपा समर्थक प्रधान तो खुश होंगे ही जिन्हें छह महीने का अधिक कार्यकाल मिल गया है। साथ ही विपक्षी दलों से जुड़े ग्राम प्रधान भी खुश होंगे जिनके कामों का हिसाब होने से फिलहाल बच गया। परम्परा से हटकर इस बार प्रशासनिक अफसरों की बजाय वर्तमान प्रधानों को ही उनकी ग्राम सभाओं का प्रशासन अगले छह महीने के लिए दे दिया गया है। और सूत्रों की मानें तो यह अवधि बढ़कर विधानसभा चुनाव के बाद तक भी जा सकती है।

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लखनऊ। योगी सरकार ने प्रधानों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना कर एक ही तीर से कई शिकार कर लिये हैं। इससे भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले वाली परीक्षा अर्थात पंचायत चुनाव से नहीं गुजरना होगा। इसके अलावा योगी सरकार की कृपा से मिली छह महीने की अतिरिक्त मलाई से कई ग्राम प्रधानों की दलीय निष्ठा भी बदल सकती है, जिसका लाभ भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनावों में हो सकता है। मतलब यह आदेश भाजपाई पैकेट में अतिरिक्त ग्राम प्रधानी का गिफ्ट है, जिसका रिटर्न गिफ्ट विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिल सकता है। इससे भाजपा समर्थक प्रधान तो खुश होंगे ही जिन्हें छह महीने का अधिक कार्यकाल मिल गया है। साथ ही विपक्षी दलों से जुड़े ग्राम प्रधान भी खुश होंगे जिनके कामों का हिसाब होने से फिलहाल बच गया। परम्परा से हटकर इस बार प्रशासनिक अफसरों की बजाय वर्तमान प्रधानों को ही उनकी ग्राम सभाओं का प्रशासन अगले छह महीने के लिए दे दिया गया है। और सूत्रों की मानें तो यह अवधि बढ़कर विधानसभा चुनाव के बाद तक भी जा सकती है।

* भाजपाई पैकेट में ग्राम प्रधानी की मलाई !
* प्रधानों को प्रशासक बना ग्राम पंचायतों में पकड़ की कोशिश
* छह महीने की मलाई से बदल जाएगी काफी लोगों की दलीय निष्ठा
* विधानसभा चुनाव से पहले की परीक्षा से भी बच गई योगी सरकार

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाकर योगी सरकार ने सभी ग्राम प्रधानों को उपकृत किया है। चूंकि बिना पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय हुए चुनाव हो नहीं सकते, इसलिए यह कार्यकाल बढ़ाना पड़ा है। इस आदेश से भाजपा के पक्ष में माहौल बना है। इससे भाजपा पंचायत चुनाव की एक गंभीर परीक्षा से बच गई है। बताया जाता है कि जब भी विधानसभा चुनाव के पहले ग्राम पंचायत के चुनाव होते हैं तो वे आने वाले विधानसभा चुनाव पर असर डालते हैं। उनके परिणाम विधानसभा चुनाव की अच्छी-खराब बुनियाद बनाते हैं। इसीलिए कहा जा रहा है कि ऐसा करके योगी सरकार इससे बच गई है।

जानकारी के अनुसार सरकार ने ऐसा कदम इसलिए उठाया है, क्योंकि उसे हाईकोर्ट के आदेश से पिछड़े वर्ग का आरक्षण तय करना है। सरकार ने अभी कुछ दिन पहले ही इस काम के लिए समर्पित एक आयोग का गठन किया है, जिसका कार्यकाल छह महीने का है। और अब तक की प्रेक्टिस में शायद ही कोई आयोग तय समय में अपनी रिपोर्ट दे पाया है। ऐसे में आयोग का समय बढ़ सकता है। और अगर आयोग का कार्यकाल बढ़ेगा तो फिर इन ग्राम प्रधानों/प्रशासकों का भी भला हो सकता है।

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा था, इसलिए उनका कार्यकाल बढ़ाना जरूरी हो गया था। सामान्यतः होता यह है कि जब ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया जाता है तो प्रशासन अधिकारियों को सौंप दिया जाता है। लेकिन इस बार प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर तुरुप का पत्ता फेंका है। ऐसे में भाजपा के समर्थक ग्राम प्रधान तो उसके रहेंगे ही, दूसरी पार्टियों से जुड़े ग्राम प्रधान भी भाजपा के पक्ष में निष्ठा बदल सकते हैं, क्योंकि वे भाजपा से उपकृत हैं। ऐसे में उन्हें अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में एकजुट करने में मदद मिलेगी।

यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाया गया है। 26 मई को इनका कार्यकाल खत्म हो रहा था। यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। पंचायती राज विभाग ने सोमवार देर शाम इसका आदेश जारी कर दिया है। यूपी में 57 हजार 694 ग्राम पंचायतें हैं। प्रदेश सरकार की चाल देखकर तो यही लग रहा है की पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे। प्रदेश में अगले साल जनवरी-फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं।

अभयानंद शुक्ल