तो अब भूल सुधार कर रहे भारत के लोग !

2024 के आम चुनाव में विपक्ष के एक फेक नेगेटिव में फंसकर भाजपा को 240 सीटों पर ही रोक देने वाली जनता अब शायद अपनी गलती सुधारने में लगी हुई है। इसीलिए 2024 के बाद से अब तक हुए 15 विधानसभा चुनावों में से जनता ने एनडीए को 11 में सफलता दिलाई है। इसमें से अकेले आठ राज्यों में भाजपा के नुमाइंदे मुख्यमंत्री बने हैं। इस दौरान विपक्ष के सिर्फ चार गढ़ ही बच पाए, जहां अभी भाजपा का भगवा राष्ट्रवाद आना बाकी है। वैसे भाजपा ने 2026 में विपक्ष के उस किले को जीत लिया है जो उसके लिए असंभव जैसा था, यानी पश्चिम बंगाल। इस राज्य की जीत ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। सपा में तो बेचैनी का आलम ये है कि अखिलेश यादव को अब हनुमान चालीसा याद आने लगी है। वे कहने लगे हैं कि उनके पंडित जी जो कहेंगे, वही वह करेंगे।

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लखनऊ। 2024 के आम चुनाव में विपक्ष के एक फेक नेगेटिव में फंसकर भाजपा को 240 सीटों पर ही रोक देने वाली जनता अब शायद अपनी गलती सुधारने में लगी हुई है। इसीलिए 2024 के बाद से अब तक हुए 15 विधानसभा चुनावों में से जनता ने एनडीए को 11 में सफलता दिलाई है। इसमें से अकेले आठ राज्यों में भाजपा के नुमाइंदे मुख्यमंत्री बने हैं। इस दौरान विपक्ष के सिर्फ चार गढ़ ही बच पाए, जहां अभी भाजपा का भगवा राष्ट्रवाद आना बाकी है। वैसे भाजपा ने 2026 में विपक्ष के उस किले को जीत लिया है जो उसके लिए असंभव जैसा था, यानी पश्चिम बंगाल। इस राज्य की जीत ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। सपा में तो बेचैनी का आलम ये है कि अखिलेश यादव को अब हनुमान चालीसा याद आने लगी है। वे कहने लगे हैं कि उनके पंडित जी जो कहेंगे, वही वह करेंगे।

* 2024 लोकसभा के बाद से अबतक 15 में से 11 राज्यों में बनी है एनडीए सरकार
* भाजपा की अकेले 8 राज्यों में सरकार है, तीन राज्यों में एनडीए की साझा सरकार
* विपक्ष को इन 15 चुनावों में से केवल चार जगह ही मिल पाई है सफलता

जानकार मानते हैं कि भाजपा को 240 सीटों पर रोक कर जनता ने उसे और सतर्क कर दिया है। और उसी का परिणाम है कि वह अपने मेहनत के बल पर विधानसभा चुनाव जीतती चली जा रही है। एक आंकड़े के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कुल 15 विधानसभाओं के चुनाव हुए हैं। इनसे से एनडीए को 11 राज्यों में सफलता प्राप्त हुई है। अकेले भाजपा के आठ राज्यों में मुख्यमंत्री बने हैं। 2027 और 2028 में भी जिन राज्यों में चुनाव होंगे, वे तो भाजपा का गढ़ जैसे हैं, मसलन यूपी, हिमाचल आदि। इसलिए आगे भी गति ऐसी ही रहने वाली है।

राजनीति में नैरेटिव का बड़ा महत्व है। और 2024 के आम चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों का परिणाम देखने के बाद नैरेटिव यही बन रहा है कि भारत की जनता 2024 के अपने निर्णय को सुधार रही है। तब भारतीय जनता पार्टी को कम सीटें देकर जनता ने ये बताने की कोशिश की थी कि वह किसी की भी बाढ़ रोक सकती है। पर जब उसे ये लगा कि उसके निर्णय को विपक्षी गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, तो अब उसने अपनी गलतियां सुधारने भी शुरूआत की है।

जानकारी के अनुसार 2024 के बाद पश्चिम बंगाल और बिहार की जीत तो ऐतिहासिक है। भाजपा और एनडीए को 2025 के विधानसभा चुनाव में भारी सफलता मिली और नीतीश कुमार सीएम बने। फिर लगभग पांच महीने बाद ही स्वेच्छा से उन्होंने भाजपा के लिए कुर्सी छोड़ दी। और अब भाजपा के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से भाजपा का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना था। और ये करिश्मा कर दिखाया है भाजपा के नेता और अब तक नेता विरोधी दल रहे सुवेंदु अधिकारी ने। उन्होंने लगातार तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी को दो बार हराया और जॉइंट किलर का खिताब पाया। भाजपा ने 2014 से अब तक अपना दायरा 7 से 22 राज्यों तक बढ़ा लिया है। इन सभी राज्यों में भाजपा की अकेले या फिर एनडीए की सरकार है।

2024 के बाद बनीं भाजपा-एनडीए सरकारें : हरियाणा में भाजपा रिपीट हुई है। महाराष्ट्र में एनडीए रिपीट हुई। अब एकनाथ शिंदे की जगह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस सीएम हैं। अरुणाचल में भी भाजपा रिपीट हुई है। उड़ीसा में बीजेडी को हराकर भाजपा की सरकार बनी है। इसके बाद 2025 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हराकर भाजपा सरकार बनी और रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बनीं। बिहार में एनडीए रिपीट हुई। और अब भाजपा के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। इसी प्रकार 2026 में असम में दूसरी बार भाजपा के हिमंत बिस्व सरमा को जीत मिली है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार भाजपा सरकार सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी है। इसके अलावा सिक्किम में एनडीए की सरकार बनी है। इसी दौरान आंध्रप्रदेश में भी जगनमोहन रेड्डी को हराकर चंद्रबाबू नायडू की एनडीए सरकार बनी है। 2026 में पुडुचेरी के चुनाव के बाद एनडीए रिपीट हुई है।

इसी प्रकार विपक्ष ने इस दौरान चार राज्यों में खुद को मजबूत किया है।झारखंड में झामुमो के गठबंधन ने फिर सरकार बनाई और भाजपा सत्ता से दूर ही रही। जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने के बाद हुए चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने सरकार बनाई। कई सालों बाद तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति का अवसान हो गया और अभिनेता विजय थलपति की टीवीके ने काफी जद्दोजहद के बाद सरकार बना ली है। इसी प्रकार केरलम में वाम मोर्चा को हराकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ की सरकार बन सकती है।

अभयानंद शुक्ल