पश्चिम बंगाल में हार, यूपी में चढ़ा बुखार

पश्चिम बंगाल के परिणाम देख कर यूपी के विपक्ष की चिंता बढ़ा गई है। वहां हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण और मुस्लिम महिलाओं के भी पल्टी मार लेने से सपा का नेतृत्व परेशान हैं। इसके चलते बात-बात पर कांग्रेस को आंख दिखाने वाले सपा नेतृत्व ने अब उनको साथ लेकर चलने का फैसला किया है। सूत्र बताते हैं कि सपा अब अपनी धार्मिक विचारधारा में भी बदलाव पर विचार कर रही है। यानी इटावा के केदारेश्वर महादेव मंदिर के साथ-साथ एक कृष्ण मंदिर बनाने पर भी विचार हो है।

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लखनऊ। पश्चिम बंगाल के परिणाम देख कर यूपी के विपक्ष की चिंता बढ़ा गई है। वहां हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण और मुस्लिम महिलाओं के भी पल्टी मार लेने से सपा का नेतृत्व परेशान हैं। इसके चलते बात-बात पर कांग्रेस को आंख दिखाने वाले सपा नेतृत्व ने अब उनको साथ लेकर चलने का फैसला किया है। सूत्र बताते हैं कि सपा अब अपनी धार्मिक विचारधारा में भी बदलाव पर विचार कर रही है। यानी इटावा के केदारेश्वर महादेव मंदिर के साथ-साथ एक कृष्ण मंदिर बनाने पर भी विचार हो है।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव रिजल्ट ने यूपी में अखिलेश यादव और उनकी पार्टी को चिंता में डाल दिया है। और रही-सही कसर पीएम मोदी ने भाजपा मुख्यालय में दिए अपने भाषण से पूरी कर दी है। पहले बात पीएम मोदी की। 4 मई को दिल्ली भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम ने कहा कि यूपी की मातृशक्ति महिला आरक्षण बिल रोकने के लिए दोषी सपा को इसका दंड आने वाले समय में देगी। वैसे तो ये पीएम मोदी का राजनीतिक बयान भर लगता है, पर इसकी टाइमिंग कुछ और ही इशारा कर रही है। क्योंकि कुछ ऐसा ही बयान पीएम ने तब दिया था जब वे बिहार की जीत के बाद भाजपा के लोगों को संबोधित कर रहे थे। तब पीएम मोदी ने कहा था कि मां गंगा बिहार से निकल कर ही पश्चिम बंगाल जाती हैं। और उनका इशारा पाकर गृहमंत्री अमित शाह ने बिना विश्राम लिए दिसंबर 2025 से ही पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थीं। जिसके सुखद परिणाम भाजपा के पक्ष में आ गए। और अब 4 मई को भी उन्होंने भाजपा मुख्यालय में कहा कि महिला आरक्षण बिल रोकने के लिए यूपी की मातृशक्ति सपा को माफ नहीं करेगी। राजनीति के जानकार मोदी के दोनों बयानों की टाइमिंग और जगह में कनेक्शन ढूंढने में लग गए हैं। खबर है कि मोदी का यह बयान आने के भाजपा मुख्यालय में एक हाई लेवल मीटिंग भी हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश पर भी चर्चा हुई है। यानी यूपी की भी तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। ये खबर आने के बाद सूचना मिली है कि सपा के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ गई है।

* पश्चिम बंगाल का चुनाव परिणाम देख सपाइयों में बढ़ी बेचैनी
* 30 फीसदी मुस्लिमों वाले राज्य में टीएमसी की हार ने बढ़ाई चिंता
* हिंदुओं के ध्रुवीकरण से समाजवादी नेता हो गये हैं परेशान

सपा के रणनीतिकारों को भय है कि अगर पश्चिम बंगाल की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी हिंदू मतों का ध्रुवीकरण हुआ तो उनका पीडीए समीकरण ध्वस्त हो जाएगा। और यह अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी है। इसी कारण‌ पश्चिम बंगाल के चुनाव पर अखिलेश यादव की कड़ी निगाह थी। उन्होंने ममता बनर्जी को अपना नैतिक समर्थन भी दिया था। हालांकि ऐसे में अब अखिलेश यादव के समर्थन में एक ही बात समझ आती है कि यूजीसी को लेकर सवर्णों की नाराजगी अगर विधानसभा चुनाव तक बनी रही तो ये भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। अन्यथा संकेत यही है कि भाजपा के लिए यूपी की राह आसान होती दिख रही है। वैसे अखिलेश यादव अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी आशा का इजहार करते हुए कहते हैं कि ‘हर फरेबी फतेह की इक मियाद होती है।

ये बात ही सच्चाई की बुनियाद होती है।’। पर जनता कब क्या फैसला लेती है। वह कोई नहीं जानता। जैसा पश्चिम बंगाल में हुआ। वहां दिसंबर 2025 तक भाजपा भी कंफर्म नहीं थी कि वह 2026 की भी में यहां की सत्ता पर काबिज हो जाएगी। पर परिस्थितियों में बदलाव और अमित शाह की मेहनत ने भाजपा को इस मुकाम पर पहुंचा ही दिया। उधर लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल का रिजल्ट आने के बाद पार्टी अपने स्टैंड में बदलाव कर सकती है। वह अब कांग्रेस के साथ बहुत सख्ती नहीं करेगी और बातचीत में नरमी बरतेगी। उनका तो यह भी कहना है कि अब तो कांग्रेस के साथ गठबंधन करना ही पड़ेगा। इसके साथ ही पार्टी हिंदुत्व को लेकर अपने स्टैंड पर भी विचार कर सकती है। यानी पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने सपा की चिंता बढ़ा दी है।

अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी सम्पादक