नौतपा के ताप में बढ़ता जा रहा काशी का राजनीतिक तापमान

* प्रियंका गांधी और डिंपल यादव के रोड शो के बाद राहुल और अखिलेश ने भी किया रैली * भाजपा ने भी अपने दिग्गजों को मैदान में उतारा, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी रणनीति तैयार की * काशी में धुआंधार प्रचार कर विपक्ष यह मैसेज दे रहा कि वह एनडीए के दबाव में नहीं * यह देखना दिलचस्प होगा कि बेमन से चुनाव लड़ रहे अजय राय मोदी को कितनी टक्कर दे पाएंगे

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लखनऊ। जेठ की दुपहरी और नौतपा के ताप के बीच देश की सबसे हॉट सीट वाराणसी का राजनीतिक तापमान इस समय पूरी तरह चढ़ा हुआ है। पार्टियों के दिग्गज बारी-बारी से यहां के समर में अपनी ताकत दिखा चुके हैं। 30 मई की शाम तक यहां प्रचार थम जाएगा और एक जून को मतदान होगा। जहां नरेंद्र मोदी यहां से जीत की हैट्रिक लगाकर प्रधानमंत्री पद की भी हैट्रिक के लिए प्रयासरत हैं वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी दो बार की हार का बदला तीसरी बार जीत से लेने की कोशिश में हैं। उनकी कोशिश को परवान चढ़ाने के लिए इंडी गठबंधन के स्टार प्रचारक राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने मंगलवार 28 मई को रैली किया। इसके पहले राजनीति में आयी दो लड़कियों की जोड़ी भी अजय राय के लिए प्रचार में उतरीं। अब इन सब की मेहनत रंग लाएगी या मोदी का जादू चलेगा यह 4 जून के मतगणना परिणाम में ही पता चल पाएगा।

उत्तर प्रदेश में सातवें और आखिरी चरण में जिन 13 सीटों पर एक जून को मतदान होना है उनमें देश की सर्वाधिक महत्वपूर्ण सीट वाराणसी भी है। भाजपा के अपराजेय योद्धा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए इंडी गठबंधन लगातार कोशिश में है। गठबंधन ने यहां अजय राय को उतारा है। वे वर्ष 2014 से ही मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में वे आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के चलते अपना प्रदर्शन ठीक नहीं कर पाए तो 2019 में सपा की प्रत्याशी शालिनी यादव के चलते बिछड़ गए। परंतु इस बार परिस्थितियां भिन्न हैं। सपा र्और कांग्रेस गठबंधन में हैं इसलिए दोनों के साझा प्रत्याशी अजय राय हैं। इस बार समाजवादी पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता उनकी जीत के लिए जी जान से लगे हुए हैं। प्रचार के आखिरी दौर में रायबरेली-अमेठी से खाली होने के बाद कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी और मैनपुरी में मतदान के बाद फुरसत पाकर समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने बीते 25 मई को यहां पर रोड शो किया। उनके रोड शो में भीड़ भी खूब जुटी, खूब माहौल बना। रोड शो के पहले प्रियंका गांधी, जिन्हें पार्टी के लोग दीदी कहते हैं और डिंपल यादव जिन्हें पार्टी के लोग भाभी कहते हैं, ने काशी के कोतवाल काल भैरव के दर्शन किए। फिर बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रोड शो किया। दोनों ने बीएचयू स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। लोग बताते हैं कि ऐसा शायद पहली बार हुआ जब किसी कांग्रेस और सपा के बड़े नेता ने चुनाव के समय महामना को याद किया हो। जानकारों का कहना है कि चूंकि काशी धर्म की नगरी है, और यहां के वोटर कुछ भी होने के पहले धर्मभीरू हैं। इसलिए खुद पर हिंदू विरोधी होने का ठप्पा मिटाने के लिए भी काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का कार्यक्रम रखा गया। दरअसल इस कार्यक्रम को विशेष रूप से रखा गया ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आरोप की धार को भी कुंद किया जा सके जिसमें वे विपक्षी गठबंधन को मुस्लिम समर्थक और सनातन विद्रोही बताते हैं।

इसके बाद मंगलवार को दो लड़कों की जोड़ी भी मैदान में आई। राहुल और अखिलेश की इस जोड़ी ने वाराणसी में सभा करके माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। इसमें लोगों की भीड़ भी जुटी। पर यह वोट में कन्वर्ट होगी या नहीं यह देखने वाली बात होगी। यहां अखिलेश यादव ने अपना दावा फिर दोहराया कि उनका गठबंधन प्रदेश की 80 में से 80 सीटें जीतेगा और नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव हारेंगे। उन्होंने दावा किया की उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में हमारे गठबंधन की लहर चल रही है। हम 300 से ऊपर सीटें जीत कर केंद्र में सरकार बनाने जा रहे हैं। उनका कहना था कि आगामी 4 जून को नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो जाएगा।

विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि वाराणसी में मोदी को हरा पाना मुश्किल है। फिर भी वे प्रचार अभियान को तेज करके यह मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि हम मोदी से नहीं डरते। उनको लगता है कि शायद इसका असर देश के अन्य चुनाव क्षेत्रों में हो। और लोग प्रचार की मजबूती देखकर अंतिम समय में इंडी गठबंधन को समर्थन दे दें। इसे एक राजनीतिक टैक्टिस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। जब अपनी सभाओं में अखिलेश यादव यह बात कहते हैं कि इंडी गठबंधन प्रदेश की 80 में से 80 सीटें जीत रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से हारने वाले हैं, तो उनके समर्थक भी इसको हजम नहीं कर पाते हैं। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं, कार्यकर्ताओं ने स्वीकार किया कि उनके अध्यक्ष का यह बयान कोरी गप्प के अलावा और कुछ नहीं है। उनका कहना है कि हां, तेज प्रचार अभियान से प्रदेश की अन्य लोकसभा क्षेत्रों में यह मैसेज जरूर जाएगा कि हम मजबूती से लड़ रहे हैं। वाराणसी में इस बार साझा प्रत्याशी उतारा है इसलिए सपा और कांग्रेस के मतों का बिखराव नहीं होगा। और यह शायद विपक्ष के लिए संजीवनी का काम कर जाए। पर ये भी सच है कि मोदी को पिछली बार यहां 65% से अधिक वोट मिले थे। ऐसे में प्रधानमंत्री की हार की कल्पना करना महज दिमागी फितूर हो सकता है।

इंडी गठबंधन के प्रत्याशी और कांग्रेस के प्रदेश अजय राय अध्यक्ष के बारे में सूत्रों का कहना है कि वे यहां से चुनाव ही नहीं लड़ना चाहते थे। वे बलिया या आजमगढ़ से टिकट चाहते थे। पर पार्टी को वाराणसी में मोदी के खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं मिल रहा था इसलिए उन्हें यहां से लड़ने के लिए मजबूर किया गया। ऐसे में बेमन से लड़ रहे अजय राय क्या करिश्मा दिखाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। ये जरूर है कि उनकी खुद की छवि सुधर सकती है और शायद इसका इनाम उन्हें किसी और तरीके से मिल जाए। इंडी गठबंधन ने जब प्रियंका और डिंपल को मैदान में उतारा तो लोगों ने कहा, चलो दो लड़के नहीं सफल हुए तो दो लड़कियां ही सही। ये दोनों ही शायद विपक्ष का बेड़ा पार कर दें। सूत्रों ने बताया कि अजय राय ने इसके लिए विशेष रूप से निवेदन किया था। वे शुरुआती दौर में ही दोनों का कार्यक्रम चाहते थे किंतु पांचवें दौर के चुनाव तक प्रियंका रायबरेली और अमेठी में व्यस्त थीं। तब तक डिंपल यादव भी खुद मैनपुरी से चुनाव लड़ रही थीं। ऐसे में दोनों जगह मतदान होने के बाद उनका वाराणसी का कार्यक्रम तय किया गया।

इस सीट की की गंभीरता को देखते हुए भाजपा ने भी अपने दिग्गजों को मैदान में उतार दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते 27 मई को यहां कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर प्रचार अभियान की समीक्षा की। उन्होंने भी वाराणसी आने के बाद पहले काल भैरव और भगवान भोलेनाथ के भी दर्शन किए। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को सीजनल हिंदू बताया। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी यहां पर अपना चुनावी कार्यक्रम कर चुके हैं। प्रचार अभियान के आखिरी समय तक और भी भाजपाइयों के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मतदान के दिन काशी में ही रहेंगे।

इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही की बात-बात में मोदी से अपनी तुलना करने वाले और मोदी को कोसने वाले आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल 28 मई की शाम तक वाराणसी में नहीं दिखाई पड़े। केजरीवाल भी 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़कर हार चुके हैं। यहां की चुनावी फिजा के बारे में बनारस के लोगों का कहना है कि-इ बनारस हौ भैया, जेकरे साथ रहलस ओकरे साथे रहि। मोदी फिर जीतिहें। उधर काशी पत्रकार संघ के पदाधिकारी रहे वाराणसी के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस बार भी मोदी की जीत होगी। यह जरूर है कि जीत का अंतर क्या होगा इस बारे में बता पाना थोड़ा मुश्किल है। विपक्ष जिस तरह से मेहनत कर रहा है उसका कुछ न कुछ तो परिणाम आएगा ही पर भाजपायों का विश्वास इस पर मोहर नहीं लगाता। अब देखना यह है कि काशी के मन में मोदी है तो कितना है।

अभयानंद शुक्ल
राजनीतिक विश्लेषक