123 जिंदगियां हलाक, पर बाबा पाक-साफ

* बड़ा गजब का है नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा का सियासी रसूख * हाथरस भगदड़ की घटना में अभी भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं * राजनीतिक पार्टियां बाबा के बारे में बोलने से डर रहीं, वोट बैंक का है सवाल * हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग की भी जांच जारी * पुलिस ने भी एसआईटी गठित करके शुरू कर दी है अपनी कार्रवाई

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लखनऊ। नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा उर्फ सूरज पाल जाटव के इस समय 24 जगहों पर आश्रम हैं। उसका मुख्यालय मैनपुरी का आश्रम है। जहां इस समय उसके छिपे होने का अंदेशा है। हाथरस के सिकंदरा राऊ में गत दो जुलाई को सत्संग के बाद बाबा की चरण रज लेने के लिए मची भगदड़ में 123 लोगों की मौत हो गई है पर भोले बाबा फिर भी पाक-साफ है। घटना के बाद से सरकार, राजनीतिक हलकों, मीडिया और जनता में हलचल मची है। प्रदेश सरकार ने बाबा के मुख्य सेवादार और कार्यक्रम के आयोजक देव प्रकाश मधुकर समेत कई ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मधुकर समेत कुछ लोग पकड़े भी गए हैं। पर भगदड़ के बाद से ही बाबा भूमिगत है। सूत्रों का कहना है कि बाबा अपने मैनपुरी के आश्रम में है लेकिन पुलिस इसकी तस्दीक नहीं कर रही है। दो जुलाई को हुई इस घटना के बाद शनिवार 6 जुलाई को बाबा का एक वीडियो संदेश वायरल हुआ है जिसमें उसने घटना के प्रति दुख जताया है और हताहतों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

इस मामले में उल्लेखनीय है कि पुलिस ने अभी तक बाबा का नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किया है। कुछ लोग जहां बाबा को सीधे ज़िम्मेदार मानते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं उनके समर्थक कह रहे हैं कि यह भोले बाबा की ही कृपा थी कि उन्होंने बाकी लोगों को बचा लिया और सिर्फ 123 लोगों की ही मौत हुई। इसके इतर बाबा की शक्तियों को लेकर दुविधा में फंसे लोग कह रहे हैं कि यदि बाबा सभी लोगों को जिंदा कर देंगे तो हम उनकी शक्ति को मान लेंगे नहीं तो उन्हें पाखंडी कहेंगे। इन लोगों को अभी भी विश्वास है कि बाबा प्रकट होकर अवश्य ही कोई चमत्कार करेंगे।

अब तक मीडिया की नजरों से लगभग दूर रहे इस बाबा के बारे में बताया जाता है कि प्रदेश के 16 जिलों में बाबा का प्रभाव क्षेत्र है। इन जिलों में 13 से लेकर 26 फीसदी तक दलित वोटर हैं, जिन उन पर नारायण साकार हरि का तगड़ा प्रभाव है। खबर है कि बाबा के प्रभाव में ही इस इलाके में बसपा का दलित वोट पिछले लोकसभा चुनाव में टूटकर इंडिया और एनडीए के पास चला गया है। इस कुल 21 फ़ीसद वोटों में से काफी अखिलेश और उनके गठबंधन को मिला और कुछ एनडीए को। लोगों का आरोप है कि बाबा पर अभी तक कार्रवाई न होने का प्रमुख कारण उनके साथ जुड़ा दलित वोट बैंक है। इसी से पर्टियां उनके खिलाफ बयान देने से बच रही हैं। सभी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता बाबा से मिलने और आशीर्वाद लेने जाया करते हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी 2023 में बाबा के सत्संग में जाकर उसका यशोगान कर चुके हैं। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। मामला 2023 का बताया जाता है।

खबरें यह भी हैं कि इन जिलों के दलित बिरादरी के अधिकतम वोट बाबा के इशारे पर मिलते हैं। बाबा जिसे आशीर्वाद दे देते हैं उसकी जीत हो जाती है। अब इधर जल्द ही यूपी में लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुए 11 विधानसभा क्षेत्रों का उपचुनाव होना है। इसमें अखिलेश यादव द्वारा छोड़ी गई करहल सीट भी है। ऐसे में बाबा के खिलाफ बोलने का जोखिम कौन उठाएं। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के 21 फीसदी से अधिक दलित वोटरों में से 12% जाटव हैं। और भोले बाबा उर्फ सूरज पाल जाटव इसी बिरादरी का है। इसलिए राजनीतिक दल सावधानी बरत रहे हैं।

दो जुलाई को हुई इस दुर्घटना के बाद अब तक भूमिगत रहे भोले बाबा ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर घटना के प्रति दुख व्यक्त किया है। उसने कहा है कि हम लोगों की मदद में लगे हुए हैं। सभी लोगों को जांच की कार्रवाई और व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। कोई दोषी बख्शा नहीं जाएगा। इस बारे में अन्य पार्टियों के स्टैंड से इतर बसपा सुप्रीमो मायावती ने काफी दिनों बाद अपना स्टैंड क्लियर किया है। उन्होंने साफ शब्दों में बाबा समेत सभी जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने शासन और प्रशासन से भी विना दबाव में आए कार्रवाई करते की मांग की है।

उधर अखिलेश यादव ने अबतक हुई गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो लोग धटनास्थल से दूर थे उन्हें पकडा जा रहा है और जो लोग असली गुनहगार हैं उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है। उनकी मांग है कि अब तक हुई गिरफ्तारी की भी न्यायिक जांच की जानी चाहिए। अखिलेश कहते हैं कि भगदड़ की घटना के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। सरकार मामले को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश में है। किंतु वे बाबा पर कार्रवाई के लिए पूछे गए सवाल पर कुछ नहीं बोलते हैं और पीड़ितों के गरीब होने के बात कह कर सवाल डाल जाते हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आगे की कार्रवाई के लिए जिन 50 लोगों की सूची बनाई है उनमें अधिकतर सपा समर्थक लोग ही हैं। इस मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव का कहना है कि हादसों का क्या है, हादसे तो होते ही रहते हैं। इसमें बाबा का क्या दोष। भगदड़ तो अन्नामलाई मंदिर में भी हुई थी। रामगोपाल यादव के इस बयान की बाबत जब एक पत्रकार ने अखिलेश यादव से सवाल किया तो उन्होंने पलटकर पत्रकार पर ही आरोप लगा दिया, और कहा कि तुम बीजेपी की भाषा क्यों बोल रहे हो, भाजपा की भाषा मत बोलो। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शुक्रवार को अलीगढ़ और मैनपुरी गए लेकिन हाथरस नहीं। बाद में काफी हो हल्ला होने पर वे हाथरस भी गए और पीड़ितों से मिले। उनकी मांग है कि पीड़ितों को और अधिक मुआवजा मिलना चाहिए। लेकिन बाबा पर कार्रवाई के सवाल पर वे मौन हो गये।

इस मामले में प्रदेश सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्य तो सीधे-सीधे बाबा को क्लीन चिट दे देती हैं। वे कहती हैं कि भक्तों को सावधानी बरतनी चाहिए थी, वैसे भी हादसा बाबा के जाने के बाद हुआ है, इसमें बाबा का क्या दोष। उनका कहना है कि कोई भी बाबा अपने चरणों की रज लेने के लिए नहीं कहता है। यह तो लोगों की श्रद्धा है और इसका कोई इलाज नहीं है। उधर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई के नाम पर मुख्य आयोजक और मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर के खिलाफ एक लाख रुपए के ईनाम की घोषणा की थी। वह सिकंदरा राऊ, हाथरस का रहने वाला है। पुलिस में उसे दिल्ली के पास से शुक्रवार की रात गिरफ्तार भी कर लिया है। आखिरी बार उसी की बात भोले बाबा से हुई थी। सूत्रों का कहना है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा है, उसके सारे बयान बाबा को बचाने के लिए ही सामने आ रहे हैं। इस मामले में कुछ और लोग भी पकड़े भी गए हैं। उधर सत्संग में गई एक महिला ने पत्रकारों के सामने खुलासा किया है कि सत्संग स्थल पर कई लोग नशे में थे। और वे लोगों को धक्का मार रहे थे। उसका दावा है कि उसके चलते भी भगदड़ मची होगी। उस महिला का कहना था कि उसने उन लोगों को झिड़का भी था और कहा था इतने पवित्र कार्यक्रम में तुम्हारा यह व्यवहार ठीक नहीं है।

खबर है कि पुलिस इस एंगल से भी मामले की जांच कर रही है। इस मामले में प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण का कहना है कि कई अज्ञात लोगों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। अगर किसी की संलिप्तता पाई जाएगी तो कार्रवाई होगी। किंतु वह भी सीधे-सीधे बाबा के बारे में पूछे गए सवाल टाल जाते है। उधर अब बाबा पर जमीनों पर अवैध कब्जा करने के आरोप भी सामने आने लगे हैं। उनसे दुखी लोग अब बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग तो एनकाउंटर तक की मांग कर रहे हैं। अलीगढ़ के जितेंद्र की पत्नी की भी इस भगदड़ में मौत हो गई थी। जितेंद्र ने एक टीवी चैनल के कैमरे पर बाबा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहां गए एक भक्त ने बताया की बाबा से आमने-सामने मिलने का रेट भी 50 लाख रुपए था। सेवादार पहले ही तय कर लेते थे, उसके बाद ही बाबा से मुलाकात हो पाती थी। बताते हैं कि इसी चक्कर में बाबा अपने भक्तों से दूरी बनाकर रखते थे।

बहरहाल, भगदड़ की परिस्थितियां चाहे जो भी रही हों, सच यही है कि इस भगदड़ में 123 लोगों की मौत हो गई। बाबा ने अपने भक्तों को चरण रज लेने के लिए उकसाया हो या नहीं परंतु उस चरण रज के लिए भगदड़ हुई, यह भी सच है। और अगर चरण रज लेने की परंपरा पहले से थी तो बाबा और उनके सेवादारों को इसके लिए उपयुक्त इंतजाम करना चाहिए था, क्योंकि पुलिस तो बाबा के पंडाल में जा ही नहीं सकती थी। बाबा का रसूख इतना तगड़ा था कि उनके चलते उनके सेवादार पुलिस को सत्संग स्थल के अंदर जाने ही नहीं देते थे। ऐसे में अंदर तो सेवादारों की व्यवस्था चलती थी। फिर उनको अपनी व्यवस्था दुरुस्त रखनी चाहिए थी। इसलिए बाबा को भगदड़ होने के आरोपों से मुक्त नहीं किया जा सकता। सवाल तो उन पर भी उठेंगे ही। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने भी अपनी दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं किया और वे बाबा के रसूख के दबाव में आ गए। इसके चलते ढाई लाख की भीड़ बेकाबू हो गई और इतना बड़ा हादसा हो गया। पर ये राजनीतिक मजबूरी ही है कि इस समय मायावती के अलावा कोई भी अन्य नेता बाबा की गिरफ्तारी के लिए आवाज उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहा।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि मायावती का भी यह बयान इसलिए आया है क्योंकि बाबा के चलते ही लोकसभा चुनाव में उनका दलित वोट बैंक उनसे छिटका है। हो सकता है यह बात सही हो परंतु उन्होंने इतना साहस तो दिखाया है, यही बड़ी बात है।

अभयानंद शुक्ल
राजनीतिक विश्लेषक