लखनऊ। पासी समाज को अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश में कांग्रेस एक नए चक्कर में फंस सकती है। ये मामला दो पासी योद्धाओं को लेकर उठा है। पिछले दिनों राहुल गांधी ने अपने रायबरेली दौरे में राणा बेनी माधव के सेनापति बीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया तो उसके तुरंत बाद मलिहाबाद में राजा कंसा पासी के किले का विवाद पैदा हो गया। दिक्कत अब ये है कि अगर कांग्रेस बीरा पासी की प्रतिमा के अनावरण का श्रेय लेगी तो उसे कंसा पासी के किले के विवाद में भी कूदना ही पड़ेगा, अन्यथा प्रतिमा अनावरण का श्रेय लेने में दिक्कत होगी। और अगर वह कंसा पासी किले के विवाद में कूद कर पासियों का साथ देती है तो मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी का खतरा है। यानी न उगलते बनेगा न निगलते। और भाजपा ने अपने एक ही वार से कांग्रेस को चकरघिन्नी बना दिया है। इतना कि राहुल गांधी की सेना ने अभी तक कंसा पासी किले को लेकर कोई रिएक्शन नहीं दिया है। पर आज नहीं तो कल कोई स्टैंड तो लेना ही पड़ेगा, यदि प्रतिमा अनावरण का श्रेय लेना है तो। यानी भाजपा ने राहुल के बीरा पासी के जवाब में राजा कंसा पासी किले का मजबूत दांव चल दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीते दिनों अपने रायबरेली दौरे में राणा बेनी माधव के सेनापति रहे बीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया था। मंशा थी कि इस बहाने दलितों और विशेषकर पासी समाज को ये मैसेज दिया जाए कि कांग्रेस ही दलितों की सच्ची हिमायती है। पर लगता है कि भाजपा कांग्रेस की चाल समझ गयी और फिर मलिहाबाद के पास कसमंडी कला स्थित राजा कंसा पासी किले का विवाद अचानक तेज हो गया। जिस जगह ये दावा किया जा रहा है कि वह राजा कंसा पासी का प्राचीन किला है, उस जगह को मुस्लिम समाज मजार-मस्जिद बताता है। दावा है कि इसका निर्माण अवध के नवाबों ने कराया था और यहां काफी समय से नमाज अदा हो रही है। पर अब हिंदुओं ने इस पर अपना दावा फिर ठोंककर हनुमान चालीसा पढ़ने की जिद लगा ली। विवाद बढ़ा तो प्रशासन ने वहां किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी है। यहां तक कि बकरीद पर भी नमाज नहीं हुई। और फिलहाल का सच यही है कि राजा कंसा पासी किले की आवाज में बीरा पासी की प्रतिमा का शोर दब गया है। और राहुल गांधी के सारे किए धरे पर मिट्टी पड़ गई है। उधर कसमंडी कलां के पासियों ने कंसा पासी ने नाम पर एक बड़ा सा गेट बनवाया है। अब हिंदू वहां पर नमाज का विरोध करने लगे हैं। हालत ये है कि बकरीद के पहले वाली शुक्रवार की नमाज भी नहीं हो पाई। और तो और बकरीद पर भी नमाज नहीं हो पाई।
* बीरा पासी की प्रतिमा के अनावरण के बहाने पासी समाज को साधने की थी कोशिश
* उसी के बाद लखनऊ में राजा कंसा पासी किले का जिन्न बोतल से बाहर है आया
इस बारे में हिंदुओं का कहना है कि वहां एक मंदिर है, इसलिए वहां नमाज नहीं होनी चाहिए। बीते मंगलवार को हिंदू संगठनों के लोग हनुमान चालीसा पाठ करने की जिद पर अड़ गए थे।पुलिस ने उन्हें किले से 50 मीटर दूर ही रोक दिया। लोगों का कहना है कि महाराजा कंसा पासी महा पराक्रमी थे और उक्त जगह उनका किला है। राजा कंसा ने सालार मसूद गाजी को भी चुनौती दी थी। जबकि मुसलमानों का दावा है कि ये मस्जिद और मजार है जो लखनऊ के नवाबों ने बनवाया था। उनका यह भी दावा है कि यहां काफी दिनों से नमाज होती चली आ रही है।
अब इस विवाद में मौलानाओं और महंतों की भी एंट्री हो गई है। इस बारे में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का कहना है कि जिस जगह को लोग महाराज कंसा पासी का किला बता रहे हैं वो दरअसल अवध के नवाबों द्वारा बनवाया गया मकबरा है। उस जगह पर हिंदुओं का दावा गलत है। दूसरी तरफ इस मामले में अयोध्या की तपस्वी छावनी के महंत परमहंस आचार्य का कहना है कि राजा कंसा पासी किले की लड़ाई में वे पासी समाज और हिंदू पक्ष के साथ हैं। उन्होंने कहा है कि इस लड़ाई में वे हर तरह की मदद के लिए तैयार हैं। यानी 2027 के लिए एक और सियासी युद्ध क्षेत्र तैयार हो गया है, जो हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को और हवा देगा। पर एक बात तो तय लग रही है कि राजा कंसा पासी किले के विवाद ने राहुल गांधी के पासी प्रेम वाले नैरेटिव की हवा निकाल दी है। अब कोई कांग्रेस नेता बीरा पासी की प्रतिमा अनावरण का श्रेय लेता नहीं दिख रहा है। यानी सारी मेहनत बेकार।
राणा बेनी माधव के सेनापति बीरा पासी : बीरा पासी 19वीं सदी में रायबरेली जिले की शंकरपुर रियासत के शासक राणा बेनीमाधव बख्श सिंह के एक अत्यंत वीर, पराक्रमी और विश्वसनीय सेनापति थे। पासी समाज का ये योद्धा एक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी था। उनका जन्म लोधवारी गाँव के गरीब परिवार में हुआ था। कम उम्र में माता-पिता का निधन होने के बाद वे अपनी बहन के परिवार के साथ रहे। स्थानीय बोली में बहन के परिवार में रहने वाले व्यक्ति को “वीर्ना” कहा जाता है। वीरा पासी अपने अदम्य साहस और शारीरिक ताकत के कारण राणा बेनी माधव की सेना में शामिल हुए और बाद में सेनापति बने। 1857 के गदर के दौरान अंग्रेजों ने जब राणा बेनी माधव को बंदी बना लिया था, तब वीरा पासी ने अद्भुत साहस दिखाते हुए उन्हें कैद से छुड़ा लिया था। वीरा पासी का इतना खौफ था कि ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पकड़ने या ठिकाने की जानकारी देने वाले के लिए ₹50,000 का भारी इनाम घोषित कर रखा था।
कसमंडी कलां का राजा कंसा पासी किला : लखनऊ जिले में मलिहाबाद के पास स्थित कसमंडी कलां के राजा कंस पासी अवध क्षेत्र के अत्यंत प्रतापी और वीर राजा थे। स्थानीय इतिहास के अनुसार, उन्होंने 980 से 1031 ईस्वी तक शासन किया। उनका साम्राज्य मलिहाबाद, काकोरी से लेकर हरदोई और उन्नाव तक फैला हुआ था। महाराजा कंसा पासी को एक महान योद्धा माना जाता है। उन्होंने विदेशी आक्रमण कारियों से लोहा लिया। कसमंडी कलां गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित एक प्राचीन ढांचे को लेकर पासी समाज का दावा है कि ये स्थल महाराजा कंसा पासी का प्राचीन किला और शिव मंदिर है। इसके पुरातात्विक महत्व को देखते हुए लाखन आर्मी और पासी समाज इस जगह को राजा कंसा पासी का किला मानकर संरक्षण की मांग कर रहे हैं। इस स्थल पर प्राचीन दीवारें और नाग-कलश जैसी आकृतियाँ मिलने का दावा है। इस ढांचे के स्वामित्व, मंदिर या मकबरा होने को लेकर पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद की स्थिति है।
अभयानंद शुक्ल


