वाग्देवी का भी आशीर्वाद मिल गया बाबा को !

मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला यानी वाग्देवी मंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आने से सभी भाजपाई विशेषकर यूपी के बहुत खुश हैं। खुश इसलिए, क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। और इस चुनावी मौसम में पार्टी के लिए इससे बड़ी खबर कुछ हो ही नहीं सकती।‌ उसे इससे हिंदुत्व का ज्वार लाने में मदद मिलेगी और पश्चिम बंगाल की तरह सत्ता का विनिंग समीकरण बनाने में मदद मिलेगी। यानी जिस प्रकार भाजपा को न्यू बाबरी मस्जिद के विवाद ने पश्चिम बंगाल में जिताया उसी प्रकार भोजशाला पर मिली जीत से उठे हिंदुत्व का ज्वार यूपी में जिताएगा। क्योंकि यूपी में भोजशाला जैसे कई मामले पहले से ही चल रहे हैं। यानी योगी आदित्यनाथ को वाग्देवी का आशीर्वाद भी मिल गया है।

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लखनऊ। मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला यानी वाग्देवी मंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आने से सभी भाजपाई विशेषकर यूपी के बहुत खुश हैं। खुश इसलिए, क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। और इस चुनावी मौसम में पार्टी के लिए इससे बड़ी खबर कुछ हो ही नहीं सकती।‌ उसे इससे हिंदुत्व का ज्वार लाने में मदद मिलेगी और पश्चिम बंगाल की तरह सत्ता का विनिंग समीकरण बनाने में मदद मिलेगी। यानी जिस प्रकार भाजपा को न्यू बाबरी मस्जिद के विवाद ने पश्चिम बंगाल में जिताया उसी प्रकार भोजशाला पर मिली जीत से उठे हिंदुत्व का ज्वार यूपी में जिताएगा। क्योंकि यूपी में भोजशाला जैसे कई मामले पहले से ही चल रहे हैं। यानी योगी आदित्यनाथ को वाग्देवी का आशीर्वाद भी मिल गया है।

* एमपी के धार जिले की भोजशाला में जीत के बाद यूपी में भी उम्मीदें बढ़ीं
* वाग्देवी मंदिर विवाद का फैसला उसी बुनियाद पर है जिस राम मंदिर का हुआ
* अब यूपी में काशी, मथुरा, संभल और जौनपुर के विवाद भी तेजी पकड़ेंगे

वैसे मुस्लिम पक्ष भी हारने को तैयार नहीं है। वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की रणनीति बनाने में लगा है। फैसला आते ही असदुद्दीन ओवैसी और मौलाना महमूद मदनी की सियासत भी शुरू हो गई है। यानी एक बात तय है कि इस फैसले के बाद एक बार फिर हिंदू और मुस्लिम विवाद जोर पकड़ेगा। यूपी में पहले से ही काशी, मथुरा, संभल, और जौनपुर के विवाद चल ही रहे हैं। अब तो बाराबंकी जिले के देवा शरीफ की वारिस अली शाह की मजार पर भी मंदिर होने का दावा ठोंक दिया गया है। मतलब चुनावी मौसम आते ही एक बार फिर हिंदुत्व का ज्वार जोर मारेगा। और यदि मुसलमान किसी पार्टी विशेष के लिए एकजुट होगा तो जवाब में हिंदू भी पोलराइज होंगे, जैसा पश्चिम बंगाल में हुआ। वैसे भी पश्चिम बंगाल में योगी आदित्यनाथ का स्ट्राइक रेट लगभग 90 फीसदी है। और इसका भी असर पड़ेगा ही।
भोजशाला का मुकदमा 121 साल पुराना है। पर इस चुनावी मौसम में हिंदुओं के पक्ष में आया मध्य प्रदेश की इंदौर खंडपीठ का फैसला काफी महत्वपूर्ण है। सच्चाई का पता लगाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे किया। और अब सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को भी निरस्त कर दिया है।

आदेश में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार वहां पर हजारों साल पुराने सिक्के मिले हैं, ओम नमः शिवाय की आकृति, सीताराम की आकृति मिली है, जो मस्जिद के बनने के समय से बहुत पहले के बताए जाते हैं। रिपोर्ट में यह भी तय पाया गया कि वहां मौजूद कथित मौला मस्जिद का निर्माण भी मंदिर तोड़ने के बाद निकले अवशेषों से किया गया है। तब हाईकोर्ट ने लगभग 121 साल पुराने इस विवाद का अंत करते हुए माना कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मुसलमान चाहें तो अपने लिए अलग मस्जिद के लिए राज्य सरकार से जमीन मांग सकते हैं। इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने असंतुष्टि जताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।‌ मुस्लिम पक्ष का कहना है कि एएसआई की रिपोर्ट ही फर्जी है। इसमें तमाम बातें छिपाई गई हैं, और कुछ बेबुनियाद बातें डाली गई हैं। आरोप है कि उस रिपोर्ट में सही बात नहीं बताई गई है। ऐसे में हमें विश्वास है कि हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।

फैसला आने के बाद एआइएमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि उस जगह सात-आठ सौ सालों से नमाज पढ़ी जा रही थी, यह फैसला उचित नहीं है। ओवैसी कहते हैं कि ये प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट का उल्लघंन है। पर हम अपनी एक और मस्जिद को शहीद नहीं कर सकते। जमीयत उलेमाए हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने भी कहा कि यह फैसला अयोध्या के बाद मुसलमानों पर एक और आघात है। अगर ऐसा ही करना था तो पहले प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट समाप्त कर देना चाहिए था। वे कहते हैं कि अयोध्या के बाद मुसलमानों को दिया गया भरोसा आज टूट गया है।

इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय ऐतिहासिक है। और इससे हिंदू भावनाओं की जीत हुई है। हिंदू रोज मंदिर में पूजा कर सकेंगे। जबकि भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष कशिश वारसी ने कहा कि अल्लाह किसी भी ऐसी जगह पर नमाज मंजूर नहीं करता जो किसी दूसरे की जमीन पर बनाया गया है। उन्होंने धार समेत पूरे देश के मुसलमानों से अपील की कि वे सियासी लोगों के बहकावे में न आएं। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि भोजशाला में मंदिर बनने भर से काम नहीं चलेगा। यह ज्ञान का केंद्र था और इसे उसी रूप में स्थापित करना होगा।

अभयानंद शुक्ल