संडे हो या मंडे, अब रोज चल रहे अंडे

अंडों की लगातार हो रही बारिश, चोर-चोर के नारे, धक्का-मुक्की और पिटाई से टीएमसी नेता हलकान हैं। और आजकल पश्चिम बंगाल में यही हो रहा है। अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी से लेकर काफी लोकल नेताओं के काफिलों पर अंडे फेंके गए और बदसलूकी की गई है। हालांकि इसे जनता का ग़ुस्सा कहा जा रहा है, पर अब ये चिंता की बात हो गई है। प्रदेश सरकार को अब देखना होगा कि ये उन्मादी भीड़ खुद न्याय करने के चक्कर में मनबढ़ न हो जाए। और अगर ऐसा हुआ तो आगे चलकर ये भीड़ कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। खैर, अंडा अब पश्चिम बंगाल में बदलाव और बदले की भावना का हथियार बनता जा रहा है।

0
12

लखनऊ। अंडों की लगातार हो रही बारिश, चोर-चोर के नारे, धक्का-मुक्की और पिटाई से टीएमसी नेता हलकान हैं। और आजकल पश्चिम बंगाल में यही हो रहा है। अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी से लेकर काफी लोकल नेताओं के काफिलों पर अंडे फेंके गए और बदसलूकी की गई है। हालांकि इसे जनता का ग़ुस्सा कहा जा रहा है, पर अब ये चिंता की बात हो गई है। प्रदेश सरकार को अब देखना होगा कि ये उन्मादी भीड़ खुद न्याय करने के चक्कर में मनबढ़ न हो जाए। और अगर ऐसा हुआ तो आगे चलकर ये भीड़ कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। खैर, अंडा अब पश्चिम बंगाल में बदलाव और बदले की भावना का हथियार बनता जा रहा है।

* ट्रेंड कर रहा है पश्चिम बंगाल का अंडा न्याय
* भ्रष्टाचार के आरोपी टीएमसी नेताओं की पिटाई जारी
* चोर-चोर के नारे लगाकर हूटिंग भी की जा रही

ममता बनर्जी की सरकार जाने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में जगह-जगह टीएमसी विधायक और नेता जनता के क्रोध का शिकार हो रहे हैं। उन पर अंडे फेंके जा रहे हैं, उनके साथ हाथापाई की जा रही है। कुछ लोगों का तो सिर मुड़ाकर जुलूस निकाला गया। शुरूआती दौर में कुछ लोगों को अंडरवियर और बनियान में भी पूरे शहर में घुमाया गया, विशेषकर उस जगह घुमाया गया, जहां उनका रौला चला करता था। लगता है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने दंड देने का काम अपने हाथ में ले लिया है। प्रथम दृष्टया ये मामला जनता के क्रोध का जरूर दिखाई देता है, लेकिन ये आगे चलकर कानून-व्यवस्था का मामला भी हो सकता है। भाजपा के बड़े नेता और राज्य सरकार में नंबर दो मंत्री दिलीप घोष, मंत्री अग्निमित्रा पाल आदि कह रहे हैं कि ये जनता का गुस्सा है।

परंतु अब भाजपाईयों पर आरोप लगने लगे हैं कि वे हिंसक होते जा रहे हैं। जवाब में भाजपाई कहते हैं कि ये उन्मादी लोग भाजपा के हैं ही नहीं। उनका कहना है कि दरअसल कार्रवाई के डर से टीएमसी के लोगों ने भगवा गमछा ओढ़कर इस तरह की कार्रवाई शुरू की है, ताकि भाजपा को बदनाम किया जा सके, पर अब उनकी पहचान की जा रही है। पर सच यही है कि यह कानून व्यवस्था के लिए उचित नहीं है, जबकि हालत यह है कि हर दिन किसी न किसी पर अंडे चलने की खबर आ ही जा रही है। यानी कि पश्चिम बंगाल में इस समय अंडा न्याय चल रहा है। लोग भी कहने लगे हैं कि संडे हो या मंडे रोज चलेंगे अंडे।

जनता का ग़ुस्सा सबसे पहले अभिषेक पर उतरा। उनसे धक्का मुक्की हुई, पत्थर फेंके गए और अंडे फेंके गए। इसके बाद कल्याण बनर्जी जनता के गुस्से का शिकार हुए। टीएमसी विधायक मदन मित्रा पर भी जनता के न्याय का शिकार हुए। उनकी गाड़ी पर हमला कर अंडे मारे गए। भीड़ की मांग थी कि उनके द्वारा अब तक जो कटमनी वसूली गई है, वह वापस हो। उनपर चोर-चोर के नारे भी लगे। हालांकि विधायक मदन मित्रा का दावा है कि वे गाड़ी में नहीं थे। मदन मित्रा ममता गुट के बड़े नेता हैं।

इसके अलावा हावड़ा में टीएमसी नेता ब्रह्मानंद तो भीड़ से बचने के लिए कपड़े की दुकान में घुस गए और साड़ियों के नीचे छिप गए। बाद में पुलिस ने उन्हें निकाला। इसी प्रकार हिंसा के आरोपी शौकत मोल्ला की गिरफ्तारी के समय भी लोग अंडे लेकर इंतजार कर रहे थे। उनकी गाड़ी पर भी अंडे फेंके गए और चोर-चोर के नारे लगाए गए। प्रदेश के मंत्री दिलीप घोष का कहना है कि शौकत मोल्ला का इलाके में आतंक था। अब लोगों का ग़ुस्सा निकल रहा है। मंत्री तापस राय का भी कहना है कि यह तो होना ही था हमने पहले ही कहा था कि टीएमसी चुनाव हारेगी तो पार्टी खत्म हो जाएगी। लगभग यही बात मंत्री अग्निमित्रा पाल भी कहती हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु सरकार का भी कहना है कि माहौल बदल रहा है, और ये बदलाव जारी रहेगा, आपको अच्छा लगेगा। भवानीपुर में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि क्यों भाई, अब अच्छा लग रहा है कि नहीं। पश्चिम बंगाल बदल रहा है, अभी और बदलेगा और अच्छा लगेगा। उनका कहना है कि बहुत सी ऐसी बातें हैं, जिन्हें मैं पब्लिकली कह नहीं सकता, लेकिन आगे आपको और अच्छा लगेगा। कुल मिलाकर उनका इशारा किसी बड़े बदलाव की ओर था। पर उनकी बातों से ये ध्वनित हुआ कि वे जनता के इस कथित न्याय के खिलाफ नहीं हैं। और यह किसी भी स्वस्थ व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

अभयानंद शुक्ल