लखनऊ। सनातन ही सत्य है, यह बात ऐसे ही नहीं कही जाती है। ये मानव मात्र को मजबूर कर देता है, अपनी तरफ आने के लिए। जैसा कि अखिलेश यादव के साथ होता हुआ दिख रहा है, हालांकि उन्होंने नाक पकड़ने के लिए हाथ को पीछे की तरफ घुमाया है। उन्होंने इटावा के चंबल क्षेत्र में निर्माणाधीन केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो शेयर कर लिखा है कि निर्माण के बाद ही पूर्णता आती है। अखिलेश यादव ने ऐसा दूसरी बार किया है, मतलब उन्हें भी समझ आ गया कि सनातन ही सत्य है। जानकारों का दावा है कि अखिलेश यादव में ये बदलाव तब आया है, जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ है कि सिर्फ पीडीए की राह पर चल कर जीत हासिल नहीं होगी, इसमें हिंदुत्व का तड़का भी डालना पड़ेगा।
यानी अब उनका सियासी समीकरण पीडीएएम यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के साथ मंदिर भी हो गया है। अभी तक सिर्फ पीडीए की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव ने अब शायद अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। इसीलिए अब वे इटावा में बन रहे शिव मंदिर यानी केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो शेयर कर रहे हैं। जहां तक इस मंदिर की बात है तो इसी स्थान पर पहले कृष्ण मंदिर बनना यादव परिवार द्वारा तय किया गया था, और बताते हैं कि उसे राम मंदिर के जवाब में बनवाना तय किया गया था। परंतु अब उसी जगह पर भोलेनाथ का केदारेश्वर महादेव मंदिर बनना शुरू हो गया है। इन मामले में एक बड़ा बदलाव यह भी है।
* अखिलेश यादव का अब पीडीए के साथ मंदिर पर भी जोर
* इटावा के केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो किया शेयर
* मंत्री संजय निषाद ने उस मंदिर को चुनावी मंदिर करार दिया
खबरों के अनुसार इस मंदिर के लिए तमिलनाडु और केरल से पत्थर तराश कर लाए जा रहे हैं। इस मंदिर की खासियत यह भी है कि निर्माण में सरिया और सीमेंट का प्रयोग नहीं हो रहा है, जैसा राम मंदिर में भी हुआ है। ऐसे में विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर सपा सुप्रीमो का ये नया समीकरण काबिले गौर है। अभी तक अयोध्या राम मंदिर में जाने से परहेज करने वाले अखिलेश यादव शायद अब भोलेनाथ की शरण में हैं। इसे यह भी कहा जा सकता है कि वे भगवान राम के आराध्य की शरण में हैं। सनातन की मान्यता के अनुसार भोलेनाथ को मध्यमार्गी माना जाता है। उन्हें देव और दानव समान रूप से पूजते हैं, और कृपा भी समान रूप से बरसती है। खैर, इसे कर्नाटक के संदर्भ में देखें तो कर्नाटक में शिव के कुछ भक्त अपने को हिंदू मानते ही नहीं है। उन्हें लिंगायत कहा जाता है, वे गले में एक छोटा शिव लिंग धारण करते हैं। उन्होंने कई बार यह मांग भी उठाई है कि उन्हें अलग धर्म की मान्यता दी जाए।
वैसे बदलाव तो अयोध्या के सांसद और 2024 की जीत के बाद इंडी गठबंधन के लिए पोस्टर ब्वॉय बन कर उभरे अवधेश प्रसाद पासी में भी आया है। वे दो-तीन बार राम लला के दर्शन भी कर चुके हैं। और तो और वे राम मंदिर के भव्य निर्माण और सुंदरता की तारीफ भी कर चुके हैं। यानी पार्टी में बदलाव की प्रक्रिया पहले से जारी है। और अब तो लगता है कि अखिलेश यादव के नये पोस्ट के बाद इसमें तेजी भी आएगी।
अखिलेश ने पोस्ट किया शिव मंदिर का वीडियो : उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैंडल पर इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर की वीडियो पोस्ट की है। सपा चीफ ने मंदिर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि ‘ जब कोई अदृश्य करवाता है, तभी ऐसा बड़ा काम आकार पाता है, और दृश्यमान हो जाता है’। अखिलेश यादव ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा की स्थापना के समय भी कहा था कि जब उनके द्वारा इटावा में बनाए जा रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण संपन्न होगा, तब वे दूसरे मंदिरों के भी दर्शन करेंगे। उन्होंने वही बात इस पोस्ट में भी कहा है। उन्होंने लिखा है कि ईश्वरीय प्रेरणा से इटावा में ‘श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर’ के पूर्ण होने पर ही वे अन्य मंदिरों के दर्शन का संकल्प भी पूर्ण करेंगे।
अब इसके बाद इस पोस्ट पर सियासी बयान भी आने शुरू हो गये। यूपी सरकार के मंत्री व निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने अखिलेश यादव द्वारा बनवाए जा रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर को राजनीतिक मंदिर करार दिया है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव का मंदिर राजनीति से प्रेरित है। संजय निषाद ने कहा कि मंदिर सबके सहयोग से बनता है, जैसे राम मंदिर। इसके अलावा बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी कहा है कि अखिलेश यादव केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनवाकर अपनी नकल की प्रवृत्ति को बता रहे हैं।
अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी संपादक

