तो कांग्रेस को डर लगता है, ओवैसी से!

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को असदुद्दीन ओवैसी से डर लगता है। उन्हें लगता है कि अगर ओवैसी यूपी में इंडी गठबंधन में शामिल हो गए तो कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक उसके हाथ से निकल जाएगा। दिल्ली में संसद परिसर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के कान में कही गई यह बात सार्वजनिक हो गई है। अब इस बात की चर्चा मीडिया में तेजी से होने लगी है। कहा जा रहा है कि खड़गे का

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लखनऊ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को असदुद्दीन ओवैसी से डर लगता है। उन्हें लगता है कि अगर ओवैसी यूपी में इंडी गठबंधन में शामिल हो गए तो कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक उसके हाथ से निकल जाएगा। दिल्ली में संसद परिसर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के कान में कही गई यह बात सार्वजनिक हो गई है। अब इस बात की चर्चा मीडिया में तेजी से होने लगी है। कहा जा रहा है कि खड़गे का यह बयान कांग्रेस की बेचारगी दर्शाता है। पार्टी को लगता है कि बिहार और महाराष्ट्र के परिणामों से उत्साहित असदुद्दीन ओवैसी उसका बचा-खुचा मुस्लिम वोट बैंक भी हथिया लेंगे। पर इस मामले में कांग्रेस का कोई प्रवक्ता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

* संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सांसद इमरान मसूद से कहा, इस आदमी से बच के रहना
* कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसको यूपी मत आने देना, ये खुद बर्बाद होगा और कांग्रेस को भी कर देगा
* इमरान मसूद से चुपके से कही गई ये बात तब लीक हुई जब गलती से खड़गे का माइक ऑन रह गया था

संसद परिसर में बीते दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपने सांसद इमरान मसूद से चर्चा कर रहे थे। बातचीत के दौरान धीमी आवाज में इमरान मसूद उन्होंने यह बात कही, लेकिन माइक ने उनकी बात पकड़ ली। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ओवैसी को यूपी में आने मत देना, वरना उसका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन वह कांग्रेस को खत्म कर देगा। उनका कहना था कि वह नेशनल पार्टी नहीं है, उसका तो कुछ नहीं होगा पर हमें खत्म कर देगा। खड़गे का आशय यूपी के मुस्लिम वोट बैंक से था। यानी कांग्रेस को ओवैसी से डर लगता है। शायद इसीलिए बिहार में भी ओवैसी को इंडी गठबंधन में शामिल नहीं किया गया। अब यह खबर राजनीतिक गलियारों में घूम रही है, और लोग इसे ओवैसी की बढ़ती ताकत के रूप में देख रहे हैं। इस वार्तालाप से यह भी बात साफ होती दिख रही है कि कांग्रेस भी नहीं चाहती कि ओवैसी की पार्टी इंडी अलायंस में शामिल हो।

मल्लिकार्जुन खड़गे के इस बयान में उनकी बेचारगी भी झलकती है। चर्चा हो रही है और जो पार्टी का अध्यक्ष है, उसे अपने सांसद को यह समझाना पड़ रहा है कि ओवैसी के गठबंधन में आने की कोशिशें सफल नहीं होने देना।
इससे यह भी साफ है कि सारे निर्णय वे नहीं लेते हैं। असल में वह इमरान मसूद को समझाने का प्रयास कर रहे थे कि ओवैसी के साथ गठबंधन की किसी भी बात को प्रोमोट मत करना, नहीं तो वह कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक को खा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि यूपी में कांग्रेस के दो विधायक हैं। सूबे में अगले साल ही विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चूंकि बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सपा के साथ चुनाव लड़कर छह लोकसभा सीटें जीत ली हैं, और वह भी बिना ओवैसी के सहयोग के। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि उसकी संभावनाएं आगे भी बनी हुई हैं। वैसे बिहार और महाराष्ट्र निकाय चुनाव का ट्रेंड देखकर कांग्रेस को लगता है कि यदि ओवैसी यूपी में अकेले या इंडी के साथ चुनाव में आ गए तो कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक उनके हाथ से निकल जाएगा। और यदि ऐसा हो गया तो बची-खुची कांग्रेस भी यूपी से समाप्त हो जाएगी। खैर, इस बारे में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है। एआइएमआइएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार का कहना है कि इस विषय में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, हमें अभी इंतजार करना होगा।

इस प्रकार तेलंगाना के जुबली हिल्स विधानसभा उपचुनाव में ओवैसी का साथ लेकर जीतने वाली कांग्रेस यूपी में ओवैसी से ही डरी हुई है। यानी कांग्रेस भी ‘मीठा-मीठा गप और कड़वा कड़वा थू’ की राजनीति में विश्वास करती है। उसे तेलंगाना में तो ओवैसी का साथ पसंद है, लेकिन यूपी में उसे ओवैसी का साथ इसलिए पसंद नहीं है कि यहां ओवैसी उसका मुस्लिम वोट बैंक कब्जा कर लेंगे। और कांग्रेस के मुस्लिम प्रेम का आलम यह है कि तेलंगाना के कांग्रेसी मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी खुलेआम कहते हैं कि मुझे मुसलमानों के लिए रेवंतुद्दीन कहलाने में भी कोई दिक्कत नहीं है। वे कहते हैं कि कांग्रेस का मतलब मुसलमान है, और मुसलमान का मतलब कांग्रेस है।

अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी सम्पादक