दार्जिलिंग हिल स्टेशन: सुखद एहसास

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दार्जिलिंग हिल स्टेशन खास तौर से चाय बागानों की श्रंखला के लिए देश-दुनिया में खास ख्याति रखता है। इसे उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ हिल स्टेशन का खिताब हासिल है। इतना ही नहीं ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” को विश्व धरोहर का दर्जा भी हासिल है। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” को भारत की चाय सम्पदा का गढ़ अर्थात केन्द्र माना जाता है। समुद्र तक से करीब पौने सात हजार फुट के शिखर विद्यमान ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” अपनी खूबसूरती के लिए वैश्विक स्तर पर जाना-पहचाना जाता है।

विश्व के शीर्ष-श्रेष्ठ चाय बागान भी इसी हिल एरिया में हैं। मन-तन एवं आंखों को एक सुखानुभूति प्रदान करने वाला ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” खूबियों से भरा है। हिम शिखर को सामान्यत: आत्म उत्थान का स्थान माना जाता है। टॉय ट्रेन की सवारी, मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन, ऐतिहासिक स्थानों का सैर-सपाटा एवं पार्कों में सुखद एहसास ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” के विशिष्ट आयाम हैं। हिमालय के कंचनजंगा शिखर के अद्भुत दृश्य मन-तन को प्रफुल्लित कर देते हैं। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” के प्रमुख आकर्षण में देखें तो शांति पगोड़ा, जुलाजिकल पार्क, टाइगर हिल, बटासिया लूप, भूटिया बस्ती मठ, पद्मजा नायडू हिमालयी जुलाजिकल पार्क एवं दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन आदि इत्यादि हैं। भारत के पश्चिम बंगाल का हिस्सा है। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” का मुख्यालय दार्जिलिंग है।

‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” शिवालिक पर्वत श्रंखला में स्थित है। इस हिल स्टेशन को लघु हिमालय कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। विशेषज्ञों की मानें तो ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” एरिया में चाय की खेती वर्ष 1800 में प्रारम्भ हुयी थी। दार्जिलिंग में ब्रिाटिश शैली के विद्यालय आज भी विद्यमान हैं। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” एरिया की खोज एक ब्रिाटिश सैनिक टुकड़ी ने की थी। दार्जिलिंग शहर करीब 3150 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह शहर पहाड़ की चोटी पर स्थित है। चौतरफा चाय बागान आैर चाय की भीनी-भीनी खूशबू दिल-ओ-दिमाग को एक ताजगी से भर देती है। हरी भरी वादियां देखते ही बनती हैं। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” को खुशबू का एक शानदार एहसास कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” के चौतरफा सौन्दर्य की निराली छटा विद्यमान है। सौन्दर्य की इस निराली छटा में पर्यटक खो जाते हैं।

सक्या मठ: सक्या मठ ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” के दायरे में है लेकिन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर है। गौरतलब है कि सक्या सम्प्रदाय के मठ बहुत ही कम हैं। इस सम्प्रदाय का यह ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण मठ है। इस मठ की स्थापना 1915 ईसवी के आसपास की गयी थी। इस मठ में एक भव्य दिव्य प्रार्थना कक्ष है। इसमें एक साथ साठ से अधिक भिक्षु प्रार्थना कर सकते हैं। इस मठ की बनावट तिब्बतियन शैली में है।

माकडोंग मठ: माकडोंग मठ चौरसता से करी तीन किलोमीटर दूर आलूबरी गांव में स्थित है। यह मठ बौद्ध धर्म के योलमोवा सम्प्रदाय से ताल्लुक रखता है। इस मठ की स्थापना संगे लामा ने की थी। इस सम्प्रदाय की सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक पहचान का यह मठ केन्द्र है।

जापानी मंदिर: जापानी मंदिर की स्थापना फूजी गुरु ने की थी। स्थापना का उद्देश्य विश्व शांति का था। मंदिर का निर्माण 1972 में प्रारम्भ होकर 1992 में पूर्ण हुआ। इस मंदिर से दार्जिलिंग एवं कंचनजंगा का अति सुन्दर नजारा दिखता है।

टाइगर हिल: टाइगर हिल का मुख्य आनन्द चढ़ाई चढ़ने का है। इसी के निकट कंचनजंगा पर्वत की चोटी है। इसे विश्व की सबसे ऊंची चोटी का दर्जा हासिल है। खास यह है कि इस चोटी से कंचनजंगा एवं एवरेस्ट की चोटियां देख सकते हैं। इन दोनों चोटियों की ऊंचाई में 870 फुट का अंतर है। वर्तमान में कंचनजंगा को विश्व की तीसरी सर्वश्रेष्ठ चोटी माना जाता है। कंचनजंगा को रोमांटिक माउंटेन की खिताब से भी अलंकृत किया गया है। इसका सौन्दर्य शास्त्र ही है कि कई फिल्मों का फिल्मांकन इस पर्वत श्रंखला पर किया जा चुका है।

घूम मठ: घूम मठ टाइगर हिल के निकट ईगा चोइलिंग तिब्बतियन मठ है। यह मठ गेलुगस सम्प्रदाय से ताल्लुक रखता है। इस मठ की स्थापना मंगोलियन भिक्षु लामा शेरपा याल्तस ने की थी। इसे धार्मिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए जाना जाता है।इस मठ में गौतम बुद्ध की 15 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा बेशकीमती पत्थर की है लेकिन स्वर्ण आवरण से विभूषित है। लिहाजा प्रतिमा बेहद आकर्षक है। इस मठ में बहुमूल्यवान ग्रंथों की श्रंखला है। इनमें कालीदास की मेघदूत भी शामिल है।

भूटिया मठ: भूटिया मठ दार्जिलिंग का सबसे पुराना मठ माना जाता है। इसका निर्माण लामा दोरजे रिंगजे ने कराया था। यह मठ तिब्बतियन एवं नेपाली शैली में बना है।

पद्मजा नायडू हिमालयन जैविक उद्यान: पद्मजा नायडू हिमालयन जैविक उद्यान बर्फीले तेंदुआ एवं लाल पाण्डा के प्रजनन केन्द्र के तौर पर खास ख्याति रखता है। इस उद्यान में साइबेरियन बाघ एवं तिब्बतियन भेडिया भी देखे जा सकते है।

लियोर्डस वानस्पतिक उद्यान: लियोर्डस वानस्पतिक उद्यान भी ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” एरिया की शान है। इस उद्यान में सैकड़ो बहुमूल्यवान वनस्पतियां उपलब्ध हैं।

नेचुरल हिस्ट्री म्युजियम: नेचुरल हिस्ट्री म्युजियम की स्थापना 1903 में की गयी थी। म्युजियम में चिड़ियों, सरीसृप, जंतुओं एवं कीट-पतंगों की विभिन्न किस्म संरक्षित हैं।

दार्जिलिंग हिमालयन रेलमार्ग: दार्जिलिंग हिमालयन रेलमार्ग ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” क्षेत्र का खास आकर्षण है। करीब 70 किलोमीटर लम्बा यह रेलमार्ग इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। यह रेल खण्ड समुद्र तल से करीब 7546 फुट ऊंचाई पर है। इस रेल खण्ड का सबसे सुन्दर हिस्सा बताशिया लूप है। रेल के सफर में प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनन्द लिया जा सकता है।

‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” की यात्रा के लिए रेल, हवाई एवं सड़क मार्ग को इच्छानुसार अपनाया जा सकता है। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” का निकटतम हवाई अड्डा बागदोगरा (सिलीगुड़ी) है। बागदोगरा से ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” की दूरी करीब 90 किलोमीटर है।’दार्जिलिंग हिल स्टेशन” का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जलपाइगुड़ी है। ‘दार्जिलिंग हिल स्टेशन” सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।