इन्द्रधनुषी रंगों के जल वाली नदी कॉनो क्रिस्टिल्स

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इन्द्रधनुषी रंगों के जल वाली नदी कॉनो क्रिस्टिल्स… सौन्दर्य-लालित्य-माधुर्य, रहस्य-रोमांच का कहीं कोई अंत नहीं। जी हां, प्रकृति ने हमेशा दुनिया-धरती को अद्भुत उपहारों से लबरेज रखा। सौन्दर्य व लालित्य मन-मस्तिष्क के तारों को झंकृत कर देता है। सौन्दर्य व लालित्य का आकर्षण ही होता है, जो मीलों से पर्यटक एक झलक पाने के लिए भागते-दौड़ते चले आते हैं। ‘पानी रे पानी” तेरा रंग कैसा, जिसमें मिला दो लगे उस जैसा…. यह कथ्य-तथ्य व गुनगुनाना नैसर्गिक सौन्दर्य के सामने सटीक नहीं बैठता।

वैश्विक मानचित्र-पटल पर देखें तो पानी भी अपने वैशिष्ट्य से देश-दुनिया को आकर्षित करता है। जी हां, कोलम्बिया की नदी ‘कॉनो क्रिस्टल्स” अपनी विशिष्टता के कारण देश-दुनिया में आकर्षण का केन्द्र बनी हुयी है। इस नदी का सामान्य पानी जुलाई से नवम्बर की अवधि में इन्द्रधनुषी रंग धारण कर लेता है। कोलम्बिया की इस नदी को दुनिया की सबसे सुन्दर नदी माना जाता है। कोलम्बिया के प्रांत मेटा में यह विशिष्ट नदी स्थित है। सेरानिया डे ला मॉकरेना के रुाोत वाली यह एक सहायक नदी है। मूलत: कॉनो क्रिस्टल्स गुयाबेरो नदी की सहायक नदी है।

इस नदी व चट्टानों को दुनिया की सबसे पुरानी प्राकृतिक सम्पत्तियों में माना जाता है। यहां के पठार व चट्टानों की श्रंखला करीब 1.2 अरब साल पुराने माने जाते हैं। करीब सौ किलोमीटर लम्बी इस बहुआयामी कॉनो क्रिस्टिल्स नदी को आम तौर पर कोलम्बिया में पांच रंगों की नदी एवं इन्द्रधनुष रंगों वाली नदी भी कहा जाता है। इस नदी में झरनों की एक लम्बी श्रंखला है। इस नदी का जल एक विशेष अवधि-विशेष समय पर हरा, पीला, नीला, लाल व काला हो जाता है। खास तौर इस नदी का जल लाल हो जाता है।

विशेषज्ञों की मानें तो इस नदी का जल जुलाई से नवम्बर की अवधि में खास तौर से रंगीन होता रहता है। जल का रंगीन होने के एक बड़ा कारण विभिन्न प्रजातियों के पौधों को माना जाता है। इस नदी में मैकरेनिया क्लाविगेरा प्रजाति के पौधे बड़ी तादाद में हैं। इस पौधे की रसायनिक प्रक्रिया के कारण ही जल का रंग बदलता रहता है। इस नदी की तलहटी खास तौर से कंकड़ व पथरीली चट्टानों वाली है लिहाजा जल की निर्मलता भी अद्वितीय है। इस नदी का जल भले ही रंगीन हो लेकिन निर्मलता विशेष रहती है। कोलम्बिया का यह क्षेत्र वर्षा वन क्षेत्र के रुप में जाना-पहचाना जाता है।

इसका जल गर्म व शीतल होता है। यह परिवर्तन समय-समय पर होता रहता है। यह नदी शीतल जलचरों के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। इसमें पक्षियों की करीब चार सौ बीस प्रजातियां पायी जाती है। इतना ही नहीं उभयचरों की भी दस व सरीसृपों की 43 प्रजातियां संरक्षित हैं। ‘कॉनो क्रिस्टिल्स नदी” में जलीय पौधों की लम्बी श्रंखला पुष्पित-पल्लवित होती है लेकिन इस खूबसूरत नदी में मछलियां नहीं पायी जातीं। इन्द्रधनुषी रंगों वाली कॉनो क्रिस्टिल्स नदी दुनिया के लिए कौतुहल का विषय बनी है। पानी का रंग बदलने के कारण देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए कॉनो क्रिस्टिल्स नदी आकर्षण का केन्द्र बनी है।