नहीं मिल रहा फार्मूला नफा बढ़ाने का, स्टील अथॉरिटी चौतरफा घिरी

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स्टील अथॉरिटी चौतरफा घिरी, नहीं मिल रहा फार्मूला नफा बढ़ाने का…… कच्चे माल की बेकाबू कीमतों ने देश‌ की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक स्टील अथॉरिटी के वित्तीय समीकरणों को उलट-पलट दिया।एक तरफ स्टील उत्पादों की शिथिल मांग और दूसरी ओर उत्पादन लागत में जबर्दस्त इजाफा और ब्याज का बोझ मुनाफे को खा गया। सरकारी उपक्रम का शीर्ष प्रबंधन को अभी तक उत्पादन लागत में कमी करने के साथ ही मुनाफा बढ़ाने कीकारगर रणनीति तैयार करने में कामयाबी नहीं मिल पाई है।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का शीर्ष प्रबंधन मौजूदा में चौतरफा दबावों के भंवर में घिर गया है जिससे निकलने के लिए बोर्ड स्तर पर माथापच्ची से अभी तक कारगर समाधान हाथ नहीं लगा। वित्तीय मोर्चे पर लचर प्रदर्शन के चलते मंत्रालयी दबाव है तो दूसरी तरफ स्टाॅक मार्केट में सेल के शेयरों की चाल में बेजान हो गई है, निवेशक छिटक गए हैं। चालू माह सितंबर में तो 10 रुपये फेस वैल्यू के शेयर का भाव सुधरकर सौ रुपए के आसपास आ गया है लेकिन मार्च-अप्रैल में लुढ़क कर 81-82 रुपये के निम्न स्तर पर पहुंच गया था।

कमाई के लिहाज से 22-23 सेल के लिए अत्यन्त निराशाजनक रहा और चालू वित्तीय वर्ष 23-24 में भी बेहतर वित्तीय परिणामों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। घरेलू बाजार में स्टील की मांग शिथिल ही रहने के आसार हैं। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन से कंपटीशन में सेल बढ़ती उत्पादन लागत के कारण निर्यात के मोर्चे पर खास वृद्धि हासिल नहीं कर पाएगी। सेल 22-23 में सिर्फ 1.44 लाख टन यानी प्रति माह औसतन बारह हजार टन स्टील का निर्यात कर सकी।

सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन ने इस साल सिर्फ एक महीना – मई में 83.5 लाख टन स्टील का निर्यात किया, यह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में पड़ोसी की स्थिति। पिछले एक वर्ष में सेल को कच्चे माल की ‌लागत में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी झेलनी पड़ी, 21-22 के बराबर मात्रा में ही 22-23 में कच्चे माल की खपत होने के बावजूद इस मद पर होने वाला व्यय 42 हजार 776 करोड़ रुपए के मुकाबले 62 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हुआ। खास बात यह है कि सेल के दस उत्पादन संयंत्रों में से केवल दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला, बोकारो और आईएसपी संयंत्र ही मुनाफा कमाता है।

अब देखिए सेल पर कर्ज 21-22 में 17 हजार 284 करोड़ से बढ़कर 22-23 में 30 हजार 773 करोड़ होने से 22-23 में 2037 करोड़ रुपए का ब्याज भरना पड़ा। लेकिन सकल आय 1.04 लाख करोड़ रुपए पर सिमट गई। इन कारणों से 22-23 में सेल का करबाद लाभ 21-22 में 12 हजार 15 करोड़ रुपए से 84 प्रतिशत घटकर 22-23 में 1903 करोड़ रुपए रह गया।

प्रणतेश बाजपेयी