योगी ने यूपी से साध लिया बंगाल

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नई बाबरी पर हालिया बयान देकर सियासी माहौल गर्मा दिया है। उन्होंने यूपी में बैठे-बैठे ही पश्चिम बंगाल के हिंदू वोटरों को एकजुट करने की जुगत लगा दी है। योगी आदित्यनाथ के न्यू बाबरी पर आए ताजा बयान के बाद पश्चिम बंगाल में हिंदू मतों का ध्रुवीकरण लगभग तय हो गया है। कारण, योगी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का झुकाव बड़ी तेजी से हुमायूं की तरफ दिख रहा है। कम से कम वहां की ग्राउंड रिपोर्ट तो यही कहती है। इसीलिए लोग यह भी कहने लगे हैं कि न्यू बाबरी मस्जिद की नींव में ममता का मुस्लिम वोट बैंक दफन होने की ओर

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लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नई बाबरी पर हालिया बयान देकर सियासी माहौल गर्मा दिया है। उन्होंने यूपी में बैठे-बैठे ही पश्चिम बंगाल के हिंदू वोटरों को एकजुट करने की जुगत लगा दी है। योगी आदित्यनाथ के न्यू बाबरी पर आए ताजा बयान के बाद पश्चिम बंगाल में हिंदू मतों का ध्रुवीकरण लगभग तय हो गया है। कारण, योगी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का झुकाव बड़ी तेजी से हुमायूं की तरफ दिख रहा है। कम से कम वहां की ग्राउंड रिपोर्ट तो यही कहती है। इसीलिए लोग यह भी कहने लगे हैं कि न्यू बाबरी मस्जिद की नींव में ममता का मुस्लिम वोट बैंक दफन होने की ओर है। दूसरी ओर हुमायूं कबीर ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से धमकी भरे अंदाज में कहा है कि ये लखनऊ नहीं, मुर्शिदाबाद है। और यहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है। ऐसे में अगर उनमें हिम्मत है तो वह यहां आकर और मस्जिद निर्माण रोक कर दिखाएं, हम भी तैयार बैठे हैं। हुमायूं कबीर का दावा है कि बाबरी मस्जिद तो बन कर ही रहेगी, कोई रोक सकता है रोक ले। इसके अलावा हुमायूं कबीर ने एक सनसनीखेज आरोप भी लगाकर सियासी माहौल गर्मा दिया है। उनका आरोप है कि उनकी हत्या के लिए दो करोड़ की सुपारी दी गई है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि उन्हें किससे खतरा है।

इसके बाद भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने कहा है कि अव्वल तो मस्जिद बन ही नहीं पाएगी और यदि बन भी गयी तो हम एक बार फिर बाबरी विध्वंस कर देंगे। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी भी कहते हैं कि हम बाबर के नाम पर किसी मस्जिद को स्वीकार नहीं कर सकते। यानी पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद के निर्माण ने हिंदुओं और मुसलमानों के अलग-अलग ध्रुवीकरण का रास्ता लगभग साफ कर दिया है। और यह जितना तेज होगा उतना ही ममता बनर्जी कमजोर होंगी। और फिर उतना ही भाजपा की संभावनाएं भी बढ़ती रहेंगी। यानी राज्य में अभी तक जो लड़ाई ममता बनाम भाजपा की दिख रही थी, अब उसमें धीरे-धीरे हुमायूं कबीर का प्रवेश होता जा रहा है। मतलब विधानसभा का चुनाव आते-आते पश्चिम बंगाल की सियासी लड़ाई त्रिकोणीय होती जाएगी। और जब भी त्रिकोणीय लडाई होगी तो सीधा लाभ भाजपा को होगा। मतलब योगी आदित्यनाथ ने न्यू बाबरी मस्जिद पर बयान देकर अपना काम कर दिया है।

* आदित्यनाथ ने कहा कि कयामत तक नहीं बनेगी बाबरी
* हुमायूं कबीर की भी योगी को धमकी, हिम्मत हो तो रोकें
* न्यू बाबरी की नींव में दफन होता दिख रहा ममता का वोटबैंक
* हुमायूं कबीर बी टीम हैं तो किसके, एक बड़ा सवाल यह भी

योगी ने कहा, कयामत तक नहीं बनेगी बाबरी : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बाराबंकी में एक सभा में बाबरी ढांचे को लेकर बहुत सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण कयामत के दिन तक नहीं होगा, क्योंकि कयामत का दिन कभी आएगा ही नहीं। योगी ने कहा कि जो लोग कयामत का सपना देख रहे हैं, वे सपना देखते-देखते सड़ जाएंगे। उन्होंने राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि हमने वादा किया था कि राम लला आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, और आज वहां मंदिर बन चुका है। उन्होंने कहा कि राम भक्तों पर गोली चलाने वालों को अब कहीं जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या में केसरिया झंडा फहराने का भी जिक्र किया और कहा कि ये सनातन की ताकत दिखाता है। योगी ने कहा कि ‘जो लोग सपना देख रहे हैं, बाबरी बनाने का तो उनको बता दे रहे हैं कि उनकी इच्छा नहीं पूरी होने वाली। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो, यहां का कानून मानो। कानून मानोगे तो कायदे से रहोगे और कायदे से रहोगे तो फायदे में रहोगे। नहीं तो आगे का रास्ता सीधे जहन्नुम की ओर जाता है।

हुमायूं कबीर की सीएम योगी को खुली चुनौती : जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर बेलडांगा में नयी बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए जिद पर अड़े हुए हैं। वे कहते हैं कि जिसको मंदिर बनाना है बनाए, और गिरजा बनाना है तो गिरजा बनाए क्योंकि सबके अपने धर्म का मामला है। लेकिन मैं चूंकि मुस्लिम हूं, इसलिए मैं अपने धर्म के हिसाब से बाबरी मस्जिद बना रहा हूं। हुमायूं कबीर ने सीएम योगी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि मुसलमान होने के नाते, मैं मस्जिद बनाऊंगा, उन्हें जो करना है कर लें। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि यह लखनऊ नहीं है, यह बंगाल है, मुर्शिदाबाद है। और मुझे मैं यहां मस्जिद बनाने से कोई रोक नहीं सकता।

बड़ा सवाल-हुमायूं कबीर बी टीम हैं, तो किसके ! : भाजपा विरोधी सभी पार्टियां हुमायूं कबीर को भाजपा का बी टीम कहती हैं, जबकि भाजपा तो हुमायूं कबीर को टीएमसी की बी टीम कहती हैं। भाजपा का तर्क है कि यदि ऐसा नहीं होता तो बेलडांगा में नयी बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू नहीं हो पाता। भाजपा का कहना है कि हुमायूं कबीर के जरिए ममता बनर्जी मुसलमानों को यूनाइटेड कर रही हैं, ताकि समय पड़ने पर हुमायूं कबीर को अपने साथ ले सकें। इसके पीछे तर्क देने वाले कहते हैं कि ममता बनर्जी ने हुमायूं कबीर को अभी तक पार्टी से निकाला नहीं है, सिर्फ निलंबित किया है। और यह इस बात का प्रमाण है कि उनके रिश्ते अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। और ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि हिंदुओं को भ्रमित किया जा सके कि उन्होंने कट्टर सोच वाले हुमायूं कबीर को हटा दिया है। सूत्र बताते हैं कि इस बहाने वे अपने प्रति हिंदुओं की घटती सिंपैथी को वापस पाना चाहती हैं।

पक्ष और विपक्ष की सियासी प्रतिक्रियाएं : पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने धमकी दी है कि एक तो वे न्यू बाबरी मस्जिद बनने नहीं देंगे और यदि ऐसा हो भी गया तो उसे तोड़ देंगे। उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर यहां बाबरी के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनने देंगे। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का भी कहना है कि मुसलमान मस्जिद बनाएं और ईसाई गिरजाघर बनाएं, हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यहां बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मेरा तो पश्चिम बंगाल की जनता से अनुरोध है कि वे बीजेपी को लाएं तो हम सब कुछ ठीक कर देंगे। दूसरी तरफ यूपी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि एक तो कोई बाबरी अब इस देश में कहीं नहीं बनेगी ही नहीं और यदि बन भी गई तो टिकेगी नहीं। इसी प्रकार सूबे के दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का कहना है कि किसी के मस्जिद बनाने पर हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन बाबर के नाम पर यहां कुछ नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में राम भक्तों ने नारा दिया था कि ‘तेल लगाओ डाबर का नाम मिटाओ बाबर का’। ऐसे में देश में कहीं भी बाबर के नाम पर कुछ भी नहीं बनने दिया जाएगा। वैसे योगी आदित्यनाथ के बयान के पहले माहौल को गरमाने का काम किया विश्व हिंदू रक्षा परिषद नामक संगठन के नेता गोपाल राय ने। उन्होंने यूपी की राजधानी लखनऊ में पोस्टर लगाकर ऐलान किया है कि हम बाबरी मस्जिद को बनने नहीं देंगे। और अगर बन गई तो उसे तोड़ देंगे।

उधर विवाद में शामिल होते हुए ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने कहा है कि भाजपा को जब से पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन खिसकती दिखने लगी है और बाबरी के विरोध का दांव नहीं चल पा रहा है तो वह अब वंदे मातरम का मुद्दा लेकर आई है। इस मामले में कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद कहते हैं कि हुमायूं कबीर बीजेपी का एजेंट है। वह 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और सब कुछ बीजेपी के कहने पर कर रहा है, ताकि हिंदुओं का ध्रुवीकरण हो सके। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और सांसद संजय सिंह भी कहते हैं कि हुमायूं कबीर भाजपा का आदमी है। और यह बात इस देश के मुसलमानों और हिंदुओं को समझ लेनी चाहिए।

सबकी नजर पश्चिम बंगाल के 30 फीसद मुस्लिमों पर : दरअसल यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के बीच वाक युद्ध के पीछे पश्चिम बंगाल के 30 फीसद मुस्लिम वोटर हैं। अब तक इन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कब्जा था। पर जबसे हुमायूं कबीर ने मैदान में आकर न्यू बाबरी मस्जिद का राग अलापना शुरू किया है, मुस्लिम समुदाय का झुकाव उनकी तरफ होने लगा है। इसके अलावा खबर यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच मतों का अंतर करीब 8 फीसदी था। टीएमसी को जहां 46 फीसदी वोट मिले थे वहीं भाजपा को 38 फीसदी मत मिले थे। टीएमसी को मुस्लिम समुदाय ने अभी तक के चुनावों में भर-भरकर वोट दिया है। ऐसे में भाजपा को यह लगता है कि हुमायूं कबीर के रूप में उनके हाथ तुरुप का पत्ता लग गया है। उनका मानना है कि हुमायूं कबीर जितना ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएंगे, उतना ही भाजपा के चांस बढ़ेंगे। साथ ही जब न्यू बाबरी के नाम पर मुस्लिम हुमायूं कबीर के साथ खड़े होंगे तो प्रतिक्रिया स्वरूप हिंदुओं का भी ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में होगा। और ऐसे में वोटों का 8 फीसदी का अंतर पाटा जा सकता है। वैसे भी जानकार बताते हैं कि इस बार ममता की साख पहले की तुलना में गिरी है। इसलिए योगी का बाबरी मस्जिद वाला बयान जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण हुमायूं कबीर का रिएक्शन भी है। एक जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 30 फीसदी है। इनमें बांग्ला बोलने वाले मुस्लिम 27 फीसदी हैं और उर्दू बोलने वाले सिर्फ 3 फीसदी हैं। ममता बनर्जी ने इसी समीकरण को ध्यान में रखकर इस बार के राज्य के बजट में 5713 करोड़ रुपए सिर्फ अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसों के लिए रखे हैं। जबकि अन्य जरूरी कामों के लिए दो हजार करोड़ भी नहीं रखे गए हैं। यानी उनकी पूरी कोशिश है कि मुसलमान वोटर उनसे दूर न जाएं। और हुमायूं कबीर चाहते हैं कि वे असदुद्दीन ओवैसी की तरह पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों के नेता बन कर किंग मेकर की भूमिका निभाएं।

प्रवीण द्विवेदी
प्रमुख संवाददाता