कहीं आप जवानी में यह भूल तो नहीं कर रहे !

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सर्दी का मौसम अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। किंतु बूढ़े और बच्चों के लिए बहुत सतर्कता और सावधानी का मौसम माना जाता है। वही थोड़ी सी भी लापरवाही से युवा वर्ग भी अस्वस्थता का शिकार हो जाता है। सर्दी में कैसे अपनी सेहत को अच्छा रखें। इस विषय पर देश की प्रमुख चिकित्सा आचार्य और श्रीनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय भगवत दास घाट कानपुर की मुख्य चिकित्सका डॉ रजनी पोरवाल ने बहुत ही सारगर्भित जानकारी दी है।

भूल जवानी में दुखदाई : युवावस्था में सर्दी के मौसम में रजाई छोड़ने की इच्छा नहीं होती। सुबह होने पर बिस्तर पर ही लेटे लेटे आंखें खोलकर करवट बदलते रहते हैं और निगाह घडी पर रहती है। बीच-बीच में बिस्तर पर ही तीन चार बार चाय या काफ़ी का सेवन आलस और खुमारी को दूर करने के लिए करते हैं। सुबह-सुबह अतिरिक्त मात्रा में चाय कॉफी पीने की यह छोटी सी भूल सुबह-सुबह शरीर के अंदर निकोटीन और कैफीन की मात्रा बढ़ा देती है। यह दोनों बहुत ही हानिकारक है। जिनका बुरा प्रभाव मन मस्तिष्क और शरीर के आंतरिक अंगों पर होता है और शरीर की इम्यूनिटी तेजी से कम होने लगती है और शरीर के अंदर विषाक्तता बढ़ जाती है जो सामायिक छोटी-छोटी बीमारियों के साथ गंभीर बीमारियों को भी पैदा करने में मददगार होती है।

योगाभ्यास है इम्यूनिटी बूस्टर : एक महत्वपूर्ण भाग बात यह भी है लोग प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व या प्रातः की बेला में टहलने जाते हैं जिम करते हैं, आसन प्राणायाम का अभ्यास और मानसिक एकाग्रता के लिए ध्यान की साधना करते हैं। सर्दी का मौसम और रजाई की गर्माहट एवं आलस के कारण टहलना दौड़ लगाना जिम आदि के साथ साथ योग का अभ्यास का क्रम टूट जाता है। जीवनदायी और आरोग्य कारक योगासन प्राणायाम और ध्यान की साधना छूटने पर शरीर की रक्षा प्रणाली असक्त और कमजोर बनाता है।

रोज नहाए, भरपूर मात्रा में पानी पिए : कुछ लोग तो नित्य स्नान से भी बचते हैं साथ ही गोभी के पराठे आलू के पराठे पकोड़े आदि तली-भुनी चीजें और स्पाइसी नाश्ता भरपूर मात्रा में लेते हैं। दिन में बहुत कम मात्रा में पानी पीते हैं। सर्दी में प्यास कम लगती है तो पानी पीने का ध्यान ही नहीं आता केवल नाश्ता दोपहर भोजन और रात्रि भोजन के बाद ही लोग पानी पीते हैं। शरीर के अंदर पानी की कमी होने पर रक्त की विषाक्तता बढ़ जाती है। रक्त की अम्लता भी उच्च स्तर पर पहुंच जाती है, शरीर के अंदर पित्त की अधिकता और पौष्टिक तत्वों मात्रा में कमी हो जाती है। अच्छी सेहत के लिए भरपूर मात्रा में पानी पिए रोज नहाने और मौसम के ताजे फलों हरी सब्जी सलाद और ताजी सूप का सेवन जरूर करें।

सौन्दर्य की अनदेखी न करें : त्वचा का रूखापन होना, ओठो और एड़ी का फटना युवाओं ही नहीं बड़े बूढ़ों के लिए भी बड़ी समस्या बन जाता है। इससे बचने के लिए एक गिलास दूध में एक चम्मच देसी घी या कैस्टर ऑयल मिलाकर रात्रि सोते समय सेवन करें। रोजाना रात्रि में सोने से पहले पूरे शरीर पर देसी घी कोमलता के साथ चुपड लीजिए और फिर सो जाएं। त्वचा का रूखापन आकर्षणहीनता और त्वचा पर ठंड की कुप्रभाव से होने वाली विभिन्न समस्याएं पूरी तरह ठीक हो जाती हैं। गाजर और आंवले का मिश्रित ताजा रस का सेवन सर्दी के मौसम में पौष्टिकता की दृष्टि से ही नहीं सौंदर्य की दृष्टि से भी बहुत हितकारी है।

शरीर की रक्षा और शक्ति केंद्रों को जानिए : रीढ़ की हड्डी के अंतिम सिरे पर पूंछ वाले स्थान पर, पेट में नाभि, नासिका के दोनों छिद्रों में, सिर में दोनों कान के पीछे और छाती के बीचो बीच हृदय स्थान पर गोघृत लेकर अनामिका उंगली से शरीर के एक एक अंग में कोमल कोमल मालिश प्रतीक अंग में प्रत्येक शक्ति केंद्र में एक 1 मिनट तक करने से शरीर की रक्षा प्रणाली बहुत सशक्त हो जाती है। बूढ़े होने की दर कम हो जाती है। साथ ही साथ हृदय मस्तिष्क लीवर किडनी फेफड़ों नस नाड़ियों पर चमत्कारी प्रभाव होता है और शरीर रोगमुक्त के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।

बदसूरत पैरों को बनाएं सौंदर्य की मिशाल : प्याज को बारीक पीसकर थोड़ा सा कड़वा तेल मिला दें और इसे फटी हुई एड़ियों पर मेहंदी की तरह लगाकर ले और फटी हुई एड़ियों में बारीक चटनी की तरह पिसा हुआ प्याज भर दे। थोड़ी देर में यह प्याज सूखने लगता है तब मोजे पहन ले, प्रातः काल अजवायन 10 ग्राम को एक गिलास गर्म पानी में खूब उबालकर उस पानी से पैरों लगे हुए प्याज के अवशेषों को अच्छी तरह रगड़ रगड़ कर धो लें। इसके बाद फटी हुई एड़ियों में गलसरीन या देसी घी लगा ले। पैरों के सौंदर्य में वृद्धि के साथ-साथ यह नुस्खा फटी हुई एड़ियों को 1 सप्ताह में ही चिकना कोमल और बेदाग बना देता है। फटी हुई एड़ियों की ठंड के मौसम में प्राकृतिक खूबसूरती के लिए यह रामबाण उपाय है।

खतरनाक है जनन अंगों की खुजली : शरीर की आवश्यकता से कम पानी पीना सर्दी में शरीर की सही ढंग से और आरोग्यता की दृष्टि से समुचित साफ-सफाई ना करने और रोज स्नान न करने के कारण जननांगों के आसपास होने वाली दाद खाज खुजली का सफाया हो जाता है। कोल्ड एलर्जी के कारण उत्पन्न खुजली से बचने के लिए 10 ग्राम तुलसी की पत्तियों का रस और 50 ग्राम नीम की पत्तियों के रस में 50 ग्राम कड़वा तेल या नीम का तेल या देसी घी मिलाकर धीमी आंच पर गर्म करें और जब पानी जल जाए तो उतार कर ठंडा करके इसमें 5 ग्राम कपूर पीसकर मिला दें। प्रतिदिन स्नान करने के बाद और रात्रि में सोने से पहले दो बार जननांगों के आसपास या शरीर की अन्य किसी हिस्से में त्वचा पर होने वाली खुजली रूखापन इत्यादि के लिए यह बहुत कारगर उपाय है।

डैंड्रफ से छुटकारा : जिनको डैंड्रफ बहुत अधिक है और डैंड्रफ के कारण बालों की जड़ों के कमजोर होने, जवानी में ही अत्यधिक बाल झड़ने से परेशान हैं। वह इस तेल को रात्रि में बालों की जड़ों में लगाकर कोमलता के साथ 10 मिनट तक मालिश करें। पहले दिन ही चमत्कारिक लाभ होगा और 2 सप्ताह में तो परत दर परत पैदा होने वाला डैंड्रफ भी पूरी तरह ठीक हो जाएगा। गुच्छे गुच्छे बालों का टूटना इस अनुभूत उपाय से पूरी तरह से रुक जाता है और बालों की सेहत अच्छी हो जाती है।