पीडीए के जवाब में योगी का जीकेएवाई

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते नये चुनावी समीकरण बनते जा रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अगर अपने पीडीए समीकरण के साथ ही आगे बढ़ने का फैसला किया है, तो वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक नया चुनावी समीकरण पेश किया है। उनका समीकरण गरीब, किसान, आधी आबादी और युवा यानी जीकेएवाई पर आधारित है। अखिलेश यादव का समीकरण जहां जातीय और धार्मिक बंटवारे पर आधारित है, वहीं योगी का समीकरण जाति और धर्म से परे दिखाई दे रहा है।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते नये चुनावी समीकरण बनते जा रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अगर अपने पीडीए समीकरण के साथ ही आगे बढ़ने का फैसला किया है, तो वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक नया चुनावी समीकरण पेश किया है। उनका समीकरण गरीब, किसान, आधी आबादी और युवा यानी जीकेएवाई पर आधारित है। अखिलेश यादव का समीकरण जहां जातीय और धार्मिक बंटवारे पर आधारित है, वहीं योगी का समीकरण जाति और धर्म से परे दिखाई दे रहा है।

* गरीब-किसान-आधी आबादी-युवा, यानी जीकेएवाई पर फोकस
* योगी का ये समीकरण 2029 के चुनाव में भी मददगार होगा

खास बात यह है कि योगी का नया समीकरण हिंदुत्व के करीब भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि उसमें किसी जाति की बात ही नहीं की गई है। योगी के समीकरण में ब्राह्मण, वैश्य, शूद्र और क्षत्रिय हैं, परंतु अखिलेश यादव के समीकरण में सवर्णों का कोई स्थान नहीं है। यानी योगी का समीकरण व्यापक है। योगी कहते भी हैं कि इस समीकरण में सभी धर्म के लोगों का समावेश है। और अपने उसी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए योगी ने एसिड अटैक और तीन तलाक पीड़िताओं को सरकारी मकान और मुफ्त इलाज देने की योजना शुरू करने का फैसला किया है। ये योजना गेम चेंजर होगी। यानी योगी तुष्टीकरण नहीं संतुष्टीकरण की राजनीति करेंगे। योगी का ये महिला कार्ड अखिलेश के पीडीए को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि अगर यूपी की सभी महिलाएं जाति-धर्म का भेद मिटाकर पश्चिम बंगाल की तरह भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गयीं तो यहां भी पश्चिम बंगाल जैसा ही रिजल्ट देखने को मिल सकता है। योगी का कहना है कि सही मायने में जातियां चार ही हैं, और इनसे गरीब, किसान, आधी आबादी और युवा आते हैं। और जाति-धर्म देखे बिना सबका कल्याण हमारे डबल इंजन की सरकार की प्राथमिकता है।

योगी ने इसके साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए अपना एजेंडा भी सेट कर लिया है। पीडीए के जवाब में उनका नया समीकरण कितना प्रभावी होगा, यह तो 2027 के चुनाव में ही पता चलेगा, लेकिन पश्चिम बंगाल के हिंदुत्व का नशा अभी लोगों के दिमाग से उतरा नहीं है, और यह भाजपा की मदद करेगा। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने ऐसा नैरेटिव सेट कर दिया है कि उसे तोड़ना अखिलेश यादव या अन्य किसी के लिए मुश्किल होगा। इसके पीछे तर्क यही है कि अगर 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाले राज्य पश्चिम बंगाल में भाजपा प्रचंड बहुमत प्राप्त कर सकती है, तो यूपी में अधिकतम 20% ही मुस्लिम आबादी है। वैसे भी इन मुस्लिम वोटरों के कई दावेदार हैं, जैसे सपा, कांग्रेस, बसपा, असदुद्दीन ओवैसी आदि। इसके अलावा ये भी एक सच्चाई है कि कुछ मौलाना इस समय भाजपा और योगी के पक्ष में बयान देते दिख रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं, मौलाना हाजी गुलाम सरवर। वे कहते हैं कि अब तक हमने सबको वोट देकर देख लिया, इस बार हमें बीजेपी को वोट देकर देखना है। मौलाना साजिद रशीदी तो खुलेआम कहते हैं कि इस बार तो उन्होंने भाजपा को ही वोट दिया है। ऐसे में मुस्लिम मतों के भरोसे चुनाव जीत पाना सपा या अन्य विपक्षी दलों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

योगी आदित्यनाथ ने जो नया समीकरण सेट किया है, वह हिंदुत्व को टच करता है, जन कल्याण की बात करता है। लगता है कि सीएम योगी पुरातन वर्ण व्यवस्था से इतर एक नई व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जिसमें न कोई सवर्ण हो और न दलित। योगी की ये परिकल्पना लोगों को पसंद भी आ सकती है। और अगर योगी का ये नैरेटिव हिट हो गया तो ये लोकसभा के चुनावों में भी मदद कर सकता है। यदि ये प्रयोग सफल हुआ तो योगी एक बड़े नेता के रूप में भी उभरकर सामने आ सकते हैं।

वैसे भी समाजवादी पार्टी को इस समय कांग्रेस आंखें दिखा रही है, वह बारगेन करने की मुद्रा में है। उसके नेता बार-बार कहते हैं कि हमारी सभी 403 सीटों पर लड़ाई की तैयारी है। पार्टी के यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय कहते हैं कि हम सभी सीटों पर नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं। जवाब में सपा के प्रवक्ता दीपक रंजन भी कहते हैं कि तैयारी तो हमारी भी 403 सीटों की ही है, पर हम चाहते हैं कि विपक्ष के मतों का बंटवारा न हो। यानी दोनों ओर से माइंड गेम चल रहा है। इसकी वजह एक ही है, और वह है पश्चिम बंगाल का परिणाम। कांग्रेस भी जानती है कि अभी सपा मानसिक दबाव में है, और ऐसे में दबाव बनाया जा सकता है। पर 2024 के परिणामों से उत्साहित सपा मुखिया को अपने पीडीए पर अधिक भरोसा है। दूसरी तरफ दिल्ली में हुई इंडी अलायंस की मीटिंग के बाद जो खबरें छनकर आई हैं, उनका निचोड़ यही है कि राहुल गांधी खुद को सबसे बड़ा नेता मान बैठे हैं, इसी कारण मीटिंग में कहते हैं कि टीएमसी और सपा कंफ्यूज हैं। और जो हाल टीएमसी का हुआ है, वैसा ही अखिलेश के लिए भी चेतावनी है। राहुल गांधी का कहना है कि हमें बीजेपी को हराना है तो हरा कर ही रहेंगे। पर हम चाहते हैं कि हमारी लड़ाई में बाकी दल भी साथ दें।

अभयानंद शुक्ल