पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने अब विपक्ष की सोचने की दिशा बदल दी है। जो विपक्ष सनातन के नाम पर बिदकता था, वह हिंदुत्व की शरण में जा रहा है। शायद हिंदुओं की एका के चलते ममता बनर्जी की बुरी हार और भाजपा की प्रचंड जीत ने उसे साफ्ट हिंदुत्व की ओर जाने के लिए मजबूर कर दिया है। इसीलिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव, नेता प्रतिपक्ष राहुल गाधी और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी अब हनुमान जी याद आने लगे हैं। ये सब अब हिंदुत्व की बात भी करने लगे हैं। और तो और पहली बार भगवा आतंकवाद का नामकरण करने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राघोगढ़ के दिग्विजय सिंह उर्फ दिग्गी राजा इस समय प्रभु श्रीराम की शरण में हैं, और 11 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ करवा रहे हैं। यानी भाजपा विपक्ष को अपनी पसंदीदा हिंदुत्व की पिच पर लाती जा रही है। और हिंदुत्व की पिच यानी भाजपा की अधिक संभावनाएं।
* राहुल गांधी, अखिलेश यादव को हनुमान जी याद आने लगे
* दिग्विजय सिंह को प्रभु श्रीराम की भक्ति में आया आनंद
* पश्चिम बंगाल के रिजल्ट ने बदली सबकी चुनावी प्राथमिकता
अखिलेश यादव को अब हनुमान जी याद आ रहे : अब तक सिर्फ पीडीए की बात करने वाले और मुस्लिमों के हिमायती अखिलेश यादव अब साफ्ट हिंदुत्व की ओर चल रहे। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में रामचरितमानस को देश का सांस्कृतिक संविधान तक कहा है। वकीलों के आंदोलन में घायल एक वकील से मिलने वे गये सपा प्रमुख ने उन्हें रामायण भी भेंट की। बताते हैं कि जब पुलिस जिला कचहरी के पास अतिक्रमण हटाने के क्रम में लाठी भांज रही थी तो उस वकील को चोट लगी थी। और तब उस समय उनके हाथ में राम चरित मानस था। उसी को इंगित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा रामचरितमानस का अपमान कर रही है, जबकि रामचरितमानस हमारे देश का सांस्कृतिक संविधान है। इसके पहले अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को भी तब समर्थन दिया था जब उनका योगी आदित्यनाथ से विवाद हुआ था। ऐसा उन्होंने योगी आदित्यनाथ से राजनीतिक बढ़त लेने और ब्राह्मणों की सिंपैथी लेने की कोशिश की क्योंकि शंकराचार्य जन्म से ब्राह्मण हैं। इसके अलावा उन्होंने चेहरा दिखाने के लिए माता प्रसाद पांडे को नेता विपक्ष भी बनाया है ताकि ब्राह्मणों को संदेश दिया जा सके। बताते हैं कि अखिलेश यादव को हनुमान जी भी इसलिए याद आ रहे हैं क्योंकि ब्राह्मण समाज को आकर्षित करना है। और उनके नजदीकी लोग बताते हैं कि उनकी इस सोच का आधार यह है कि हनुमान जी वानर साम्राज्य के पुरोहित केसरी के पुत्र हैं। इसीलिए उन्होंने हनुमान चालीसा की चौपाई को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, और लखनऊ में फोटोग्राफरों के भंडारे में जाकर प्रसाद वितरण किया है। यानी ये चुनावी बदलाव है। और यही वह सनातन की ताकत है, जो पश्चिम बंगाल के चुनावों में दिखी है। पर अयोध्या के राम मंदिर से उन्हें अभी भी परहेज़ है।
राहुल गांधी भी पहुंच गए बजरंग बली की शरण : राहुल गांधी ने बीते 19 मई को अपने रायबरेली के दौरे की शुरुआत एक स्थानीय हनुमान मंदिर से की। उन्होंने मंदिर में दर्शन के बाद बड़ा सा टीका भी लगाया। ये शायद उनका साफ्ट हिंदुत्व की ओर झुकाव है, क्योंकि केरलम् में एआईएमएल के साथ सरकार बनाकर वे काफी आलोचना का शिकार हो गए हैं। ये वही पार्टी है जिसकी भारत के बंटवारे में बड़ी भूमिका बताई जाती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के चुनाव में हिंदुओं की एकजुटता से ममता बनर्जी की हार ने भी सबक दिया है कि हिंदुओं की उपेक्षा करना ठीक नहीं है। इसके पहले भी समय समय पर हिंदुओं को लुभाने के लिए अपना गोत्र बताने और जनेऊ पहनने का काम वे कर ही चुके हैं। पर केरलम् और तमिलनाडु के घटनाक्रम ने उनकी हिंदू समर्थक बनने की कोशिशों को काफी धक्का पहुंचाया है।
दिग्विजय सिंह भी आए प्रभु श्रीराम की शरण : मध्य प्रदेश के राघोगढ़ में, जो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का घर है, 11 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ चल रहा है। इसमें वे स्वयं उपस्थित रहे। उसमें उनके बेटे जयवर्धन सिंह बुलंद आवाज में हमारे राम जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। यानी भाजपा ने सभी विरोधी पार्टियों को अपनी हिंदुत्व की पिच पर खेलने के लिए मजबूर कर दिया है। राघोगढ़ का राजघराना खुद को प्रभु श्रीराम का वंशज भी मानता है। ये अलग बात है कि दिग्विजय सिंह ने हमेशा सनातन विरोधी राजनीति की है। अभी हाल ही में उन्होंने भोजशाला मामले में हिंदुओं की जीत पर भी सनातन विरोधी बयान दिया है। पर अब शायद उनका किला दरकने लगा है। इसलिए वे भी श्री राम की शरण में आ गए हैं। दिग्विजय सिंह ने ही भगवा आतंकवाद जैसे नैरेटिव का इजाद किया था।
शराब घोटाले में राहत के बाद केजरीवाल हनुमान की शरण : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में राहत मिलने के बाद बजरंगबली को अपनी पार्टी और संघर्ष का सबसे बड़ा ‘संकटमोचन’ बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हनुमान जी के आशीर्वाद के कारण ही वे साजिशों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने और मनीष सिसोदिया ने कहा है कि जिन पर हनुमान जी की कृपा होती है, उन्हें कोई हरा नहीं सकता। तब कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद उन्होंने कहा कि बजरंग बली और संविधान की कृपा से अंततः सच्चाई की जीत हुई है। केजरीवाल अक्सर अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत सफलताओं का श्रेय हनुमान जी को देते आए हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद भी उन्होंने खुलकर इसका श्रेय भगवान बजरंगबली को दिया था। वे खुद को हनुमानजी का कट्टर भक्त मानते हैं।
अभयानंद शुक्ल

