सौन्दर्य व सादगी का पक्षी अलबेट्रास

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‘अलबेट्रास” का सौन्दर्य देख कोई वजह नहीं कि आप मुुग्ध न हो जायें। सौन्दर्य व सादगी मन मोह ले तो वहीं उसमें समुद्री तूफान में भी उड़ान भरने का साहस देख कर दंग रह जायें। ‘अलबेट्रास” समुद्री पक्षियों की श्रंखला में सबसे अधिक ताकतवर व साहसी माना जाता है।

उसके साहसी तेवर का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि ‘अलबेट्रास” तेज समुद्री तूफान में भी तेज उड़ान भरने का साहस रखता है बल्कि तूफान व चक्रवात में तो उसकी उड़ान की गतिशीलता आैर भी अधिक हो जाती है।

‘अलबेट्रास” खास तौर से आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी अमरीका, जापान व उत्तरी प्रशांत सागर में पाया जाने वाला समुद्री पक्षी है। सामान्यत: अलबेट्रास की आयु साठ वर्ष होती है लेकिन अपेक्षित आहार-विहार न मिलने से कई बार आयु सीमा अवधि कम भी हो जाती है।

सामान्यत: ‘अलबेट्रास” पांच वर्ष की आयु में युवा हो जाता है। अलबेट्रास मुख्यत: मांसभक्षी पक्षी है। मछली, केकड़ा व झींगा आदि उसके मुख्य भोजन या शिकार होते हैं। भोजन की तलाश में कई बार अलबेट्रास दूर तक उड़ान भरते-भरते निकल जाता है। पुराने जंगली एवं समुद्री पक्षी में गिने जाने वाले अलबेट्रास की सामान्यत: 22 प्रजातियां मानी जाती हैं लेकिन इसकी तीन से पांच प्रजातियां अस्तित्व के गम्भीर खतरे में हैं।

अलबेट्रास की खासियत यह होती है कि इसके पंख दस से बारह फुट तक लम्बे होते हैं। हालांकि व्यस्क अलबेट्रास का वजन करीब दस किलोग्राम ही होता है। विशाल व लम्बे पंखों के कारण अलबेट्रास बिना हवा के आकाश में काफी समय तक ठहर सकता है। इसे समुद्री हवाओं की सवारी का विलक्षण पक्षी माना जाता है।

आकाश में इसकी उडान जहाज की भांति दिखती है। खास बात यह है कि अलबेट्रास की रफ्तार चाहे आकाश हो या समुद्र की गहराई हो या फिर भूमि या जमीन हो…. उसकी चाल में कहीं कोई धीमापन नहीं दिखता। अलबेट्रास की चोच विशेष आकार व आगे नुकीली होने के बजाय गोलाई लिये होती है। चोच का आकार सामान्यत: बड़ा होता है। मजबूत जबड़ा होने के साथ ही चोच तेज व धारदार होती है। पैर ताकतवर व पंजों की उंगलियां झिल्लीदार त्वचा से आपस में जुुड़ी होती हैं। जिससे उसे आकाश में उड़ान भरने व जमीन पर दौड़ लगाने में आसानी रहती है।

बदलते परिदृश्य में प्रदूषण के दंश उसे भी झेलने पड़ रहे हैं क्योंकि समुद्री परिवेश का जहरीलापन कई बार उसके लिए जानलेवा साबित होता है। कारण समुद्र में तैलीय कचरा व प्लास्टिक कचरा बड़ी तादाद में फेंका जाता है। कई बार अलबेट्रास समुद्री कचरा को भोजन की लालच में खा जाते है। यह कचरा उनके लिए कई बार जानलेवा साबित होता है तो वहीं उसका सौन्दर्य भी उसके लिए प्राणघातक साबित होता है। अलबेट्रास के पंख मुलायम व सुन्दर होते है।

लिहाजा समुद्री मछुआरा वर्ग मांस व पंख की लालच में अलबेट्रास का शिकार करते हैं। जिससे अलबेट्रास के अस्तित्व को गम्भीर खतरा खड़ा हो गया है। वन्य जीव प्रेमियों व समाज के प्रबुद्ध वर्ग को अलबेट्रास के संरक्षण के सार्थक प्रयास करने चाहिए जिससे प्रकृति के इस खूबसूरत उपहार का अस्तित्व समाप्त होने से बचाया जा सके।